
भोपाल/पन्ना। मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले आदिवासी एवं अन्य परिवारों का आंदोलन शुक्रवार को 21वें दिन भी जारी रहा। द मूकनायक की टीम जब आंदोलन स्थल पर पहुंची तो वहां का दृश्य सामान्य प्रदर्शन से अलग था। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सांकेतिक रूप से चिता पर लेटे हुए थे। इनमें महिलाओं की संख्या भी काफी थी।
कुछ प्रदर्शनकारी सांकेतिक फांसी का प्रदर्शन करते नजर आए। वहीं कुछ महिलाएं अपने शरीर पर मिट्टी लपेटे हुए बैठी थीं। आंदोलनकारियों ने इन प्रतीकों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि परियोजना के कारण उनका घर, जमीन और जीवन उजड़ने की स्थिति में है और उन्हें अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता है।
आंदोलन स्थल पर मौजूद ग्रामीण लगातार अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे। 21 दिन से चल रहे इस आंदोलन में अब गिरफ्तारी, अनशन और पुनर्वास का मुद्दा भी जुड़ गया है। गिरफ्तार किए गए अमित भटनागर का जेल में ही अनशन जारी है।
द मूकनायक से बातचीत में दिव्या अहिरवार ने कहा, “यह सिर्फ हमारी जमीन का सवाल नहीं है, यह हमारे घर, हमारी जिंदगी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है. वहां मौजूद अन्य महिलाओं ने कहा, हम सरकार को यह दिखाना चाहते हैं कि जिस जमीन पर हमने पूरी जिंदगी बिताई, वही जमीन हमसे छीनी जा रही है। हमारे लिए यह जमीन सिर्फ खेत नहीं, बल्कि हमारी पहचान और जीवन का आधार है।”
प्रदर्शन में शामिल एक युवक ने कहा, “43 परिवारों के लिए राशि स्वीकृत होना आंदोलन की एक उपलब्धि जरूर है, लेकिन अभी 229 प्रभावित परिवारों का सवाल बाकी है। जब तक हर पात्र परिवार को उसका पूरा मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। हमारे साथियों को गिरफ्तार कर लेने से हमारी आवाज नहीं दबेगी। हम चाहते हैं कि सरकार हमारे साथ बातचीत करे, अमित भटनागर और सभी गिरफ्तार साथियों को रिहा करे और विस्थापित परिवारों के भविष्य की ठोस व्यवस्था करे।”
मझगांय परियोजना से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ा सवाल भविष्य का है। जिन परिवारों की जमीन और घर परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, वे जानना चाहते हैं कि विस्थापन के बाद उन्हें कहां बसाया जाएगा और उनके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था क्या होगी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक प्रत्येक पात्र परिवार को उसका वैधानिक हक नहीं मिलता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों के मुताबिक आंदोलन के दौरान वे लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के सामने आवाज उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी और दबाव के बावजूद उनकी मांगें खत्म नहीं हुई हैं।
रामअवतार आदिवासी ने द मूकनायक से कहा, “चुनाव के समय सत्ताधारी दल आदिवासियों के कल्याण और उनके अधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग है। बिना उचित मुआवजा और पुनर्वास के हमारे पुश्तैनी जंगल और गांव हमसे छीने जा रहे हैं। जिन जगहों से हमारा जीवन और रोजी-रोटी जुड़ी है, उन्हीं जगहों से हमें हटाया जा रहा है। सरकार को पहले प्रभावित परिवारों के अधिकार सुनिश्चित करने चाहिए, उसके बाद ही किसी परियोजना को आगे बढ़ाना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “अमित भटनागर की गिरफ्तारी से यह आंदोलन खत्म होने वाला नहीं है। उन्होंने पूरे अंचल के लोगों को उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए जागरूक किया है। अब हर घर में अमित भटनागर पैदा हो चुके हैं। पुलिस की लाठियों और गोलियों का डर दिखाकर लोगों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। जब तक प्रभावित परिवारों को उनका पूरा मुआवजा, पुनर्वास और न्याय नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।”
आंदोलन के बीच शुक्रवार को जिला प्रशासन ने 43 विस्थापित परिवारों के लिए पुनर्वास अनुदान की राशि स्वीकृत कर दी। कलेक्टर ऊषा परमार ने भू-अर्जन अधिकारी के प्रस्ताव पर फैसला लेते हुए 43 पात्र परिवारों को 7.50 लाख रुपये प्रति परिवार की दर से भुगतान के आदेश जारी किए हैं।
इस हिसाब से इन 43 परिवारों को कुल 3 करोड़ 22 लाख 50 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।
जल संसाधन विभाग ने ग्राम मझगांय के मजरा बालूपुर के कुल 229 डूब प्रभावित परिवारों के लिए 17 करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपये का फंड मंजूर किया है। प्रशासन के मुताबिक पहले चरण में 43 परिवारों के खातों में राशि भेजी जा रही है।
प्रशासन की ओर से 43 परिवारों को राशि दिए जाने को आंदोलनकारियों ने महत्वपूर्ण कदम माना है, लेकिन उनका कहना है कि इससे पूरी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित कुल 229 परिवारों को पुनर्वास और मुआवजे का लाभ मिलना चाहिए। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि बाकी पात्र परिवारों को राशि कब तक मिलती है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सभी पात्र परिवारों को उनका पूरा हक नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन के बीच गिरफ्तार किए गए अमित भटनागर का जेल में आमरण अनशन शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों के अनुसार उनकी मांग है कि सरकार और प्रशासन गिरफ्तार किए गए आंदोलनकारियों को रिहा करे और विस्थापित परिवारों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले।
ग्रामीणों ने अमित भटनागर और दिव्या अहिरवार समेत गिरफ्तार किए गए अन्य साथियों की बिना शर्त रिहाई की मांग भी उठाई है।
आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों के बीच प्रशासन द्वारा 43 परिवारों के लिए राशि स्वीकृत किए जाने की चर्चा जरूर है, लेकिन आंदोलन खत्म करने को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें राहत राशि की घोषणा से ज्यादा जरूरी अपने भविष्य की सुरक्षा है। उनका सवाल है कि जिन परिवारों की जमीन, घर और जीवन परियोजना से प्रभावित हो रहा है, उनके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था कब होगी?
मझगांय में चल रहा आंदोलन अब 21वें दिन में पहुंच चुका है। एक तरफ प्रशासन ने 43 परिवारों के लिए 3.22 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, दूसरी तरफ आंदोलनकारी अभी भी सभी प्रभावित परिवारों के पूर्ण पुनर्वास और मुआवजे की मांग पर कायम हैं। यह आंदोलन अब केवल मुआवजे की राशि का मामला नहीं रह गया है। प्रभावित ग्रामीणों के लिए यह उनके घर, जमीन, आजीविका और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
ग्रामीणों का कहना है कि 43 परिवारों को मिली राशि आंदोलन की एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन मंजिल तब मानी जाएगी जब सभी पात्र परिवारों को उनका पूरा हक मिलेगा। फिलहाल मझगांय में ‘चिता आंदोलन’ जारी है। प्रशासन की ओर से पहले चरण में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि बाकी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और गिरफ्तार साथियों की रिहाई के सवाल पर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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