छत्तीसगढ़: धर्मांतरण को लेकर नारायणपुर में भारी बवाल, 12 घंटे की बैठक के बाद टला बड़ा टकराव

नारायणपुर के भरंडा गांव में धर्मांतरण पर भारी बवाल, प्रशासन की 12 घंटे की मैराथन वार्ता के बाद 26 बेघर परिवारों की घर वापसी; आदिवासियों ने दिया एक महीने का अल्टीमेटम।
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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में धर्मांतरण पर भारी बवाल। 26 आदिवासी परिवारों का सामाजिक बहिष्कार, मूल संस्कृति में लौटने के लिए मिला 30 दिन का अल्टीमेटम।फोटो साभार- इंटरनेट
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में धर्मांतरण के मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। जिले के भरंडा गांव में दो गुटों के बीच उपजे भारी तनाव के बाद पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। हालांकि, जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस विवाद को फिलहाल शांत कर लिया गया है।

यह पूरा विवाद पारंपरिक आदिवासी समाज और नया धर्म अपना चुके 26 परिवारों के बीच का है, जो हिंसक झड़प की स्थिति तक पहुंच गया था। धर्मांतरित परिवारों का आरोप है कि गांव के मूल निवासियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें जबरन घरों से बेदखल कर दिया। उन्हें कथित तौर पर यह फरमान सुनाया गया था कि या तो वे अपना नया धर्म छोड़ दें, या फिर हमेशा के लिए गांव से चले जाएं।

दूसरी ओर, पारंपरिक आदिवासी ग्रामीणों ने इन आरोपों का पुरजोर विरोध किया है। उनका कहना था कि धर्म बदलने वाले ये लोग लगातार उनके स्थानीय देवी-देवताओं, स्वदेशी रीति-रिवाजों और आदिवासी परंपराओं का अपमान कर रहे थे। मूल निवासियों की स्पष्ट मांग थी कि धर्मांतरित लोग या तो वापस अपनी पुरानी परंपराओं का पालन करें या समुदाय से बाहर निकल जाएं।

हालात बेकाबू होते देख और बस्तर जैसे संवेदनशील इलाके की स्थिति को समझते हुए गांव में तत्काल भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। किसी भी बड़ी हिंसा को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी), अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) और स्थानीय तहसीलदार तुरंत मौके पर पहुंचे और मोर्चा संभाला।

अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत करने के लिए 12 घंटों तक लगातार बातचीत का दौर जारी रखा। इस दौरान दोनों गुटों के बीच कुल 14 दौर की बैठकें हुईं। आखिरकार प्रशासन एक शांति समझौता कराने में सफल रहा, जिसके बाद बेघर हुए सभी 26 परिवारों को सुरक्षित उनके घरों में वापस पहुंचा दिया गया है।

इस समझौते के तहत आदिवासी समुदाय ने धर्मांतरित व्यक्तियों को अपने मूल धर्म में वापस लौटने के लिए एक महीने का सख्त अल्टीमेटम दिया है। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि धर्म बदल चुके लोगों को अब गांव की भौगोलिक सीमा के भीतर अपने मृतकों को दफनाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, गांव में किसी भी बाहरी धार्मिक प्रचारक या उस खास समुदाय से जुड़े व्यक्ति के प्रवेश पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

फिलहाल गांव में फौरी तौर पर विवाद सुलझ गया है और सभी निवासी अपने घरों में लौट आए हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति दोबारा न बिगड़े, इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके को कड़ी निगरानी में रखा है। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि दोनों पक्ष समझौते की शर्तों का शांतिपूर्ण ढंग से पालन करें।

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