'यह माफी नहीं, सीधा अपमान है': मणिपुर में 6 नागाओं की हत्या पर कुकी-ज़ो काउंसिल के बयान पर भड़का नागा छात्र संघ

कुकी-ज़ो काउंसिल के 'खेद' को ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ANSAM) ने बताया अपमानजनक, कहा- हत्यारों की गिरफ्तारी तक कोई माफी मंजूर नहीं।
Naga men bodies found
मणिपुर में 6 अगवा नगा पुरुषों के शव मिलने के बाद कुकी-ज़ो गांव पर हमला। इस ताजा हिंसा में 2 लोगों की मौत और घर जलाए गए। इंफाल में भारी तनाव।
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नई दिल्ली: मणिपुर में छह नागा नागरिकों की नृशंस हत्या के मामले में कुकी-ज़ो काउंसिल (KZC) द्वारा मांगी गई माफी को ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (ANSAM) ने सिरे से खारिज कर दिया है। शुक्रवार, 26 जून 2026 को शीर्ष नागा छात्र संगठन ने स्पष्ट किया कि काउंसिल का यह बयान किसी भी नजरिए से स्वीकार करने योग्य नहीं है।

छात्र संघ ने कुकी-ज़ो के शीर्ष निकाय की कड़ी आलोचना की है। दरअसल, काउंसिल ने लियांगमाई नागा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले छह मृतकों का जिक्र करते हुए उनके लिए 'कच्चा नागा' जैसे बेहद अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया था।

इससे पहले गुरुवार, 25 जून को कुकी-ज़ो काउंसिल ने नागा नागरिकों की हत्या पर अपना खेद व्यक्त किया था। इन निर्दोष लोगों को कांगपोकपी जिले के लीलोन वैफेई गांव से अगवा कर लिया गया था। यह घटना 13 मई को तीन थाउदौ (Thadou) चर्च नेताओं की घात लगाकर की गई हत्या के बाद सामने आई थी।

गौरतलब है कि थाउदौ समुदाय अपनी कुकी पहचान को लेकर बंटा हुआ है। इस समुदाय का एक वर्ग खुद को एक अलग गुट मानता है, जबकि दूसरा हिस्सा खुद को বৃহত্তর कुकी समूह से जुड़ा हुआ बताता है।

नागा छात्र संगठन का कहना है कि कुकी-ज़ो काउंसिल का यह 'खेद' न तो कोई सच्ची माफी है और न ही इस गैरकानूनी और अमानवीय अपराध की स्वीकारोक्ति। संगठन के अनुसार, यह नागा लोगों के लिए एक सीधी चुनौती और अपमान के समान है, जो उनके अहंकार और खुद को श्रेष्ठ समझने की खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है।

संगठन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पीड़ितों के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उनके गहरे पूर्वाग्रह और सांप्रदायिक तिरस्कार को उजागर करता है। इसमें कहीं से भी कोई सच्चा पश्चाताप नहीं झलकता है।

ANSAM ने अपने आधिकारिक बयान में दृढ़ता से कहा कि जब तक छह निर्दोष नागा बंधकों के अपहरण, यातना और हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के तहत कड़ी सजा नहीं दी जाती, तब तक किसी भी माफी को सच्चा और स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

छात्र संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि कांगपोकपी जिले के कुकी बहुल कोटज़िम और कोटलेंन गांवों के बीच के जिन इलाकों में तीन चर्च नेताओं की हत्या हुई थी, वहां नागाओं की न तो कोई पहुंच है और न ही कोई प्रभाव। उस घटना में नागाओं को फंसाने की कोई भी कोशिश पूरी तरह से आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण है। इसका मकसद केवल गलत जानकारी फैलाकर सांप्रदायिक दुश्मनी पैदा करना है।

केंद्र और मणिपुर सरकार से नागा नागरिकों के हत्यारों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की अपील करते हुए ANSAM ने अपनी बात समाप्त की। संगठन ने स्पष्ट किया कि कुकी समुदाय के साथ वास्तविक सुलह केवल सच्चाई, जवाबदेही, पहचान के सम्मान, ऐतिहासिक तथ्यों को स्वीकार करने और न्याय के निष्पक्ष प्रशासन से ही संभव हो सकती है।

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