
नई दिल्ली: केरल कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में राज्य की महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के हक में एक बड़ा फैसला लिया है। आगामी 15 जून से केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) की साधारण बसों में इनके लिए मुफ्त सफर की सुविधा शुरू होने जा रही है।
कैबिनेट बैठक के संपन्न होने के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती चरण में इस योजना का लाभ केवल साधारण (ऑर्डिनरी) बस सेवाओं तक ही सीमित रखा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को 'प्रियदर्शिनी' नाम दिया गया है।
यह योजना हालिया विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) द्वारा जनता से किए गए पांच 'इंदिरा गारंटियों' के वादों में से एक है। सरकार गठन के बाद अब इस चुनावी वादे को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस विशेष रियायत का लाभ हर आयु वर्ग की महिलाओं को मिलेगा, चाहे उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि कैसी भी हो। इसके साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय को भी इसमें शामिल किया गया है। इस योजना के क्रियान्वयन से केएसआरटीसी पर सालाना 750 से 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ने का अनुमान है।
इस अतिरिक्त वित्तीय भार को संभालने के लिए राज्य सरकार खुद आर्थिक मदद मुहैया कराएगी। यह राशि निगम को वर्तमान में मिलने वाली 1,500 करोड़ रुपये की वार्षिक सहायता के अतिरिक्त होगी। इसके साथ ही सरकार ने केएसआरटीसी प्रबंधन को आगामी छह महीनों के भीतर अपनी आय बढ़ाने के ठोस प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।
निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए रूटों पर वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी, नए शेड्यूल तैयार होंगे और बसों पर विज्ञापनों का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले चरण के अनुभवों और जनता से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर भविष्य में इस योजना में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
योजना की सफलता और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए हर महीने इसकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस दौरान यदि कोई तकनीकी या व्यावहारिक समस्या सामने आती है, तो उसका तत्काल निवारण किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मालाबार क्षेत्र और विशेषकर मलप्पुरम जिले में साधारण बसों की कमी को लेकर सवाल पूछा गया, तो मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने स्वीकार किया कि मलप्पुरम में केएसआरटीसी केवल 28 प्रतिशत सेवाओं का ही संचालन करता है और वहां की अधिकांश आबादी निजी बसों पर निर्भर है, जिस पर आगे विचार किया जाएगा।
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