गोरखपुर: आने वाला गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) उत्तर प्रदेश, और विशेषकर गोरखपुर के लिए सम्मान और गर्व का एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। सामाजिक स्वीकार्यता और समावेशिता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रदेश की चार ट्रांसजेंडर नई दिल्ली में आयोजित होने वाली भव्य गणतंत्र दिवस परेड में 'विशेष अतिथि' (Special Guests) के रूप में शामिल होंगी। ये चारों गोरखपुर स्थित 'गरिमा गृह' शेल्टर होम से जुड़ी हुई हैं।
आधिकारिक पुष्टि और यात्रा कार्यक्रम
गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि ये सभी सरकारी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए 24 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना होंगी। यह न केवल इन चार व्यक्तियों के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।
गरिमा गृह की संस्थापक एकता माहेश्वरी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मुझे एक आधिकारिक ईमेल के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई। यह हम सभी के लिए एक बेहद गर्व का क्षण है।"
संघर्ष से सफलता तक: जानिए कौन हैं ये खास मेहमान
चयनित अतिथियों में से हर किसी की अपनी एक प्रेरक कहानी है:
दीपिका (34 वर्ष): मूल रूप से कुशीनगर की रहने वाली दीपिका ने जीवन में कड़ी मेहनत की है। दिल्ली में एक एनजीओ (NGO) के साथ काम करने के बाद, उन्होंने मेकअप आर्टिस्ट के रूप में प्रशिक्षण लिया और आज आत्मनिर्भर हैं।
हीर (21 वर्ष): कुशीनगर की ही निवासी हीर का सफर आसान नहीं था। उन्होंने बचपन में सामाजिक भेदभाव, ताने और अवसाद (Depression) जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया। इन मुश्किलों से लड़ते हुए उन्होंने एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान को स्वीकारा और आगे बढ़ीं।
लाडो (20 वर्ष): गोरखपुर की लाडो वर्ष 2019 में गरिमा गृह से जुड़ी थीं। वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने सहयोगी परिवार और यहां मिले व्यावसायिक प्रशिक्षण को देती हैं, जिसने उन्हें एक स्वतंत्र पहचान बनाने में मदद की।
एकता (38 वर्ष): गरिमा गृह का नेतृत्व कर रहीं एकता मूल रूप से लखीमपुर खीरी की हैं। वह 2007 में गोरखपुर आईं और 2011 में इस शेल्टर होम की स्थापना की।
बदलाव की बयार
एकता ने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा, "मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे इस शेल्टर होम के जरिए हम ट्रांसजेंडर समुदाय के जीवन को बदलने और उसे बेहतर बनाने में सक्षम हो पा रहे हैं।"
यह पहल समाज में समानता के अधिकार को मजबूत करने और हाशिए पर खड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है।
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