MP में दूषित पानी से मौतों पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार से मांगे ठोस जवाब, आंकड़े को लेकर भ्रम की स्थिति!

हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि अब टालमटोल नहीं चलेगी। लोगों की जान गई है और इसकी जिम्मेदारी तय करना सरकार और निगम दोनों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर.इंटरनेट.
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भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मामला मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में गंभीर बहस का विषय बना। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान नगर निगम और राज्य शासन से साफ-साफ सवाल किए, लेकिन किसी के पास मौतों की ठोस वजह और जिम्मेदारी को लेकर पुख्ता जवाब नहीं था। कोर्ट ने यह मानने से इनकार कर दिया कि केवल आधे-अधूरे अनुमानों के आधार पर इतने बड़े हादसे की जिम्मेदारी टाली जा सकती है।

निगम की दलील पर कोर्ट संतुष्ट नहीं

सुनवाई में इंदौर नगर निगम की ओर से कहा गया कि भागीरथपुरा में एक शौचालय के कारण पानी की लाइन में गंदा पानी मिल रहा था, जिसे अब ठीक कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या निगम 100 फीसदी दावे के साथ कह सकता है कि यही वजह थी। निगम ने कहा कि केवल शौचालय ही नहीं, बल्कि संकरी गलियां और ड्रेनेज तथा पानी की पाइपलाइन का साथ-साथ होना भी वजह हो सकता है। कोर्ट ने दोबारा सवाल किया कि क्या निगम दावे के साथ यह कह सकता है कि ड्रेनेज का पानी मिलने से ही लोगों की मौत हुई। इस सवाल पर निगम की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया, जिससे कोर्ट की नाराजगी और बढ़ गई।

मौतों की संख्या पर भी भ्रम की स्थिति

पिछली सुनवाई की तरह इस बार भी मौतों की संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रही। अतिरिक्त महाधिवक्ता और मुख्य सचिव के बयानों में भी फर्क दिखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया, मनीष यादव, रितेश इनानी और अनिल ओझा ने दलील दी कि सरकार और निगम सही आंकड़े छिपा रहे हैं और अब तक यह साफ नहीं किया गया कि कितने लोगों की मौत दूषित पानी से हुई है। कोर्ट ने इस स्थिति को बेहद गंभीर माना।

शिकायत की व्यवस्था पर कोर्ट का सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुख्य सचिव अनुराग जैन से पूछा कि अगर कोई आम नागरिक गंदे पानी की शिकायत करना चाहे तो उसके लिए क्या व्यवस्था है। मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बताया कि हर सप्ताह जल सुनवाई हो रही है, नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव रोज रिपोर्ट ले रहे हैं, सीएम हेल्पलाइन, 311 ऐप और जल सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह तो आप अपनी ही रिपोर्ट पढ़ रहे हैं, लेकिन यह बताइए कि आम आदमी तक यह व्यवस्था वास्तव में कैसे पहुंचती है और वह आसानी से शिकायत कैसे दर्ज करा सकता है।

फटकार के बाद बनी राज्य स्तरीय जांच समिति

हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद राज्य शासन ने राज्य स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय कुमार शुक्ल बनाए गए हैं। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि और संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास के आयुक्त संकेत भोंडवे को सदस्य बनाया गया है। इंदौर संभाग के आयुक्त सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव बनाया गया है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपनी होगी।

शुरुआत में कार्रवाई, फिर जांच में सुस्ती

मामले के सामने आने पर शुरुआत में सरकार ने सख्ती दिखाई थी। एसीएस नीरज मंडलोई और संजय दुबे इंदौर पहुंचे, भागीरथपुरा का दौरा किया और जिम्मेदार अधिकारियों से बात की। इसके बाद निगमायुक्त को हटाया गया, अपर आयुक्त और अधीक्षण यंत्री को निलंबित किया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपर कलेक्टर पंवार नवजीवन विजय को जांच सौंपी थी, लेकिन अब तक उनकी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इस देरी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, आईसीएमआर की टीम अपनी रिपोर्ट पहले ही शासन को दे चुकी है, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पूरे इंदौर में फैल रही है चिंता

हाईकोर्ट में यह भी सामने आया कि सिर्फ भागीरथपुरा ही नहीं, बल्कि इंदौर के कई इलाकों से दूषित पानी की शिकायतें आ रही हैं। लोग लगातार उल्टी-दस्त, बुखार और संक्रमण की शिकायत कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत ज्यादा खराब बताई जा रही है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह किसी एक मोहल्ले की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

अब जवाबदेही तय करने की घड़ी

हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि अब टालमटोल नहीं चलेगी। लोगों की जान गई है और इसकी जिम्मेदारी तय करना सरकार और निगम दोनों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। अब सबकी नजरें राज्य स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट पर हैं, जिससे तय होगा कि दोष किसका है, किन पर कार्रवाई होगी और पीड़ित परिवारों को न्याय और मुआवजा कब मिलेगा। भागीरथपुरा की घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है कि अगर पूरे शहर की जल व्यवस्था नहीं सुधरी, तो ऐसा संकट फिर किसी और इलाके में भी खड़ा हो सकता

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