बंगाल में वामदलों के बुक स्टालों पर हमलों का सिलसिला जारी, किताबें फाड़ी जा रही, तोड़े जा रहे स्टाल

पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों के बुक स्टालों पर उपद्रव जारी। आरएसएस और बीजेपी नेताओं ने की घटनाओं की निंदा, तो सीएम शुभेंदु अधिकारी ने वामदलों को दी नसीहत।
West Bengal Left parties book stall attack
पश्चिम बंगाल में वामदलों के बुक स्टालों पर हो रहे हमलों से सियासी घमासान तेज। जानें सीएम शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी-आरएसएस नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं।
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पश्चिम बंगाल: राज्य वामपंथी दलों के बुक स्टालों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले चौबीस घंटों के दौरान अशोकनगर और सिलीगुड़ी में भी ऐसे ही स्टालों पर सुनियोजित हमले किए गए।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कई नेता इन घटनाओं की कड़ी निंदा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार वामदलों और उनके बुक स्टालों की आलोचना कर रहे हैं।

सिलीगुड़ी में दक्षिणपंथी समूहों ने कुछ किताबों की सामग्री पर घोर आपत्ति जताते हुए स्टॉल पर धावा बोल दिया। इसके चलते कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सीपीआई (एम) ने बुधवार (21 अक्टूबर) को आरोप लगाया कि उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में भी मंगलवार रात उनके एक स्टॉल पर हमला हुआ था। इस हिंसक झड़प में कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।

राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने इस पूरी घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हिंदू बहुलवाद और किताबों के प्रति बंगालियों का प्रेम उन्हें वामपंथी दलों के बुक स्टालों पर हो रही इस तोड़फोड़ का समर्थन करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देता।

दासगुप्ता ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि किताबों के प्रति पारंपरिक बंगाली सम्मान की वजह से ही हम इन घटनाओं से स्तब्ध हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इसी बहुलवादी परंपरा के तहत भाजपा ने वाजपेयी सरकार के दौरान सलमान रुश्दी (जिन्हें अपना वीजा वापस मिला था) और तस्लीमा नसरीन जैसे लेखकों का बचाव किया था। उनका मानना है कि यही हिंदू बहुलवाद हमारी राह तय करता है, न कि वे लोग जो उदारवादी होने का सिर्फ दिखावा करते हैं।

हालांकि, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का रुख इस मामले में बिल्कुल अलग नजर आ रहा है। उन्होंने वामदलों पर निशाना साधते हुए कहा कि हम सभी किताबों से प्यार करते हैं, लेकिन आप लोग किसी भी सनातनी हिंदू रीति-रिवाज को नहीं मानते। उनका तर्क है कि वामपंथी नेता परंपराओं का विरोध करते हैं, फिर भी दुर्गा पूजा पंडालों के ठीक सामने अपने बुक स्टॉल लगाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने वाम दलों को दो टूक नसीहत दी कि उन्हें अपनी किताबें सिर्फ अपने पार्टी दफ्तरों के अंदर से ही बेचनी चाहिए।

हाल के दिनों में बीजेपी और आरएसएस के कई प्रमुख नेताओं ने इन हमलों की खुले शब्दों में निंदा की है। पश्चिम बंगाल में आरएसएस के बड़े नेता जिष्णु बसु ने स्पष्ट किया है कि किताबों को नष्ट करने या बुक स्टालों में तोड़फोड़ करने में कोई गौरव की बात नहीं है।

स्वपन दासगुप्ता ने भी जोर देकर कहा कि इस तरह की बर्बरता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब ऐसे उपद्रवी कृत्यों के लिए उनकी पार्टी के नाम का इस्तेमाल होता है, तो उन्हें बेहद शर्मिंदगी महसूस होती है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पार्टी के नाम का सरासर दुरुपयोग कर रहे हैं और संगठन इसे बिल्कुल सहन नहीं करेगा।

इस सियासी घमासान के बीच विपक्षी नेता भी वामदलों के समर्थन में खुलकर उतर आए हैं। ममता-तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष और पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने अपना समर्थन जताने के लिए वामपंथी दलों के बुक स्टालों का दौरा किया और वहां से किताबें भी खरीदीं।

पूरे राज्य के विभिन्न हिस्सों में सीपीआई (एम), एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन द्वारा लगाए गए बुक स्टालों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इन आपराधिक घटनाओं में स्टालों को तहस-नहस करना, आगजनी और वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को खुलेआम धमकाना शामिल है।

इससे पहले 17 अक्टूबर को जादवपुर इलाके में सीपीआई (एम) के एक अस्थायी बुक स्टॉल को पूरी तरह जमींदोज करने के लिए बाकायदा एक बुलडोजर लाया गया था। लेकिन स्थानीय निवासियों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने साहस दिखाते हुए बुलडोजर के सामने मानव श्रृंखला बना ली, जिसके बाद उसे पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।

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