
लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राज्य की पीलीभीत सदर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि इस क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए हैं, जबकि उनके मतदाता पहचान पत्र (EPIC) और सीरियल नंबर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की है।
बुधवार 21 अक्टूबर को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान यूपी के लिए एआईसीसी (AICC) प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि एक ऐसा सिस्टम तैयार कर लिया गया है, जिसके जरिए मनचाहे उम्मीदवार को जिताया या हराया जा सकता है।
गौतम ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची का अंतिम ड्राफ्ट 10 अप्रैल, 2026 को प्रकाशित हुआ था। उनका दावा है कि इसके बाद जुलाई से सितंबर के बीच वोटर डिटेल्स में गुपचुप तरीके से बदलाव किए गए। इस दौरान मतदाताओं के नाम तो बदल दिए गए, लेकिन उनके ईपीआईसी नंबर और सीरियल नंबर जस के तस रखे गए।
इस हेरफेर के खतरों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई मतदाता अंतिम ड्राफ्ट में अपना नाम, पता और ईपीआईसी नंबर देखता है, तो वह निश्चिंत हो जाता है कि उसका वोट सुरक्षित है। लेकिन अगर बाद में उसका नाम बदल दिया जाए, तो मतदान के दिन ईपीआईसी कार्ड और पहचान पत्र होने के बावजूद उसे वोट डालने से रोका जा सकता है।
पीलीभीत सदर के आंकड़े पेश करते हुए गौतम ने दावा किया कि वहां 13,150 वोटरों के नाम बदले गए हैं। इसके अलावा 884 ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए जो अभी भी उसी इलाके में रहते हैं। वहीं, 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए हैं जिनका उस क्षेत्र से कोई वास्ता नहीं है। गौतम के मुताबिक, यह 16,554 वोटों की सीधे तौर पर हेराफेरी है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता हर बूथ की ऐसी सूचियां तैयार कर रहे हैं और अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी ऐसी ही गड़बड़ियों की आशंका है।
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील करार दिया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से अचानक नाम गायब होना एक गंभीर चिंता का विषय है, जिससे असली मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। मिश्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को 'लोकतंत्र की हत्या' बताते हुए कहा कि पार्टी इसके खिलाफ कानूनी राय लेगी और एक बड़ा अभियान चलाएगी।
कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर और तकनीक का इस्तेमाल करके मतदाताओं के नाम जोड़ने और काटने का यह पूरा खेल रचा जा रहा है।
अपनी बात को साबित करने के लिए श्रीनेत ने एक पुख्ता उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट रोल में ईपीआईसी नंबर 4G-MCM-4746 मोहम्मद यूसुफ (उम्र 35 वर्ष) के नाम पर दर्ज था। लेकिन बाद में यही नंबर रमजान अली के 35 वर्षीय बेटे हसरत के नाम पर दिखने लगा। इस मामले में ईपीआईसी नंबर, उम्र और लिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन मतदाता और उसके पिता का नाम बदल दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि ऐसे 13,150 मामले सामने आए हैं और यह बदलाव एक साथ बैच में किए गए हैं, जो सॉफ्टवेयर आधारित हेरफेर की ओर इशारा करते हैं। श्रीनेत ने चेतावनी दी कि मतदान के वक्त पहचान पत्र का मिलान न होने पर असली मतदाता वोट नहीं डाल पाएगा। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को खारिज करे। साथ ही उन्होंने लोगों से चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपना नाम चेक करने को भी कहा।
सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपी में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए हैं। उनके अनुसार, 2024 में राज्य में लगभग 15.41 करोड़ मतदाता थे। सालाना लगभग 35 लाख की वृद्धि के हिसाब से 2027 तक करीब 1.26 करोड़ नए मतदाता जुड़ने चाहिए थे। लेकिन इसके उलट, आरोप है कि लगभग 2.04 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद ने नागरिकों से इस मामले में सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हर आम इंसान को मतदाता सूची में अपनी जानकारी को वेरिफाई करना चाहिए। मसूद ने लोकतंत्र की रक्षा को हर नागरिक की जिम्मेदारी बताया और पीलीभीत में इस गड़बड़ी को पकड़ने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की तारीफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस गंभीर मसले को लेकर जल्द ही अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
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