नई दिल्ली: सोमवार को दिल्ली में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के दफ्तर के बाहर छात्रों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। कई छात्र संगठनों ने मिलकर यहां जोरदार प्रदर्शन किया। इनकी सबसे प्रमुख मांग यह है कि जून में हुए यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा में हुई धांधली को देखते हुए इस टेस्टिंग एजेंसी को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए।
दरअसल, रविवार को ही NTA ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए खलबली मचा दी थी। एजेंसी ने कहा कि अंग्रेजी, समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) और कॉमर्स विषय की यूजीसी-नेट परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी।
इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि पिछले प्रश्नपत्रों में कुछ खामियां थीं, जो निष्पक्ष और त्रुटिहीन परीक्षा के मानकों पर खरे नहीं उतरते। उम्मीदवारों की तरफ से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया था।
परीक्षा की नई तारीखों का भी ऐलान कर दिया गया है। अंग्रेजी और कॉमर्स की री-परीक्षा 9 सितंबर को आयोजित होगी। वहीं, समाजशास्त्र विषय का पेपर 10 सितंबर को लिया जाएगा।
हालांकि, दोबारा परीक्षा कराने के इस फैसले ने छात्रों के गुस्से को शांत करने की बजाय और भड़का दिया है। छात्र संगठनों का साफ कहना है कि री-एग्जाम थोपने से उम्मीदवारों पर भारी मानसिक और आर्थिक दबाव पड़ेगा।
इस उग्र विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) शामिल रहे।
प्रदर्शन के दौरान NSUI के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एनटीए की अपनी नाकामी की सजा बेकसूर छात्रों को नहीं दी जा सकती।
जाखड़ ने तुरंत प्रभाव से NTA को खत्म करने और इसके चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक एजेंसी पर बैन नहीं लगता और छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह लड़ाई यूं ही जारी रहेगी।
AISA ने भी इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने अपने बयान में कहा कि री-एग्जाम के फैसले ने छात्रों के लिए संकट को और गहरा कर दिया है। नेट के नतीजे आने में हो रही देरी की वजह से देशभर के विश्वविद्यालयों में पीएचडी एडमिशन पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।
संगठन का कहना है कि अब छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी के लिए महज दो हफ्ते का वक्त दिया गया है। एआईएसए ने आरोप लगाया कि छात्रों को एक ऐसे परीक्षा तंत्र का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जो पूरी तरह से अपारदर्शी, बेईमान और लोकतांत्रिक जवाबदेही से कोसों दूर है।
वहीं, SFI ने भी एक बयान जारी कर एनटीए के इस फैसले की कड़ी निंदा की। संगठन के मुताबिक, जो छात्र परीक्षा की तैयारी और सफर में अपना कीमती समय व पैसा पहले ही लगा चुके हैं, उन पर यह री-एग्जाम एक अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक बोझ है। इस लापरवाही भरे फैसले ने छात्रों के भविष्य को एक गहरी अनिश्चितता में धकेल दिया है।
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