
नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुए कथित अपमान के बाद तेलंगाना कांग्रेस में भारी आक्रोश है। सोमवार, 17 अगस्त को तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के सदस्यों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट आह्वान किया है कि अब समय आ गया है कि देश भर के दलित बीजेपी की नीतियों के खिलाफ एकजुट हों। यह धरना उत्तराखंड के हल्द्वानी में खड़गे के कार्यक्रम के बाद मंच का कथित तौर पर 'शुद्धिकरण' किए जाने के विरोध में आयोजित किया गया था।
इस कड़े विरोध प्रदर्शन का मुख्य आयोजन करीमनगर में किया गया। धरने में पार्टी के अनुसूचित जाति (एससी) सेल के अध्यक्ष और विधायक डॉ. कवामपल्ली सत्यनारायण ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने खड़गे को अपमानित किए जाने की इस घटना को बेहद निंदनीय बताया और समाज के वंचित वर्गों से एक साथ आने की गुहार लगाई।
यह पूरा विवाद 13 अगस्त को शुरू हुआ था। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया था कि उत्तराखंड के रामलीला मैदान में उनके भाषण के तुरंत बाद बीजेपी से जुड़े कुछ लोगों ने मंच का शुद्धिकरण किया था। इस कृत्य पर गहरा दुख जताते हुए खड़गे ने कहा था कि एक दलित पृष्ठभूमि से आने के कारण इस घटना ने उन्हें 'छुआछूत के दंश' का तीखा अहसास कराया है।
धरने में मौजूद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विधायक सत्यनारायण ने सत्ता पक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे का यह अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज के आत्मसम्मान और उनके वजूद पर किया गया सीधा हमला है। इसे किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी दलितों से बीजेपी की भेदभावपूर्ण और दमनकारी नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का आग्रह किया।
टीपीसीसी ने इस शुद्धिकरण अनुष्ठान के लिए सीधे तौर पर केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी को भविष्य में इस तरह के भेदभाव को रोकने के लिए अपना सिर झुकाकर जवाबदेही लेनी चाहिए।
सत्यनारायण ने बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और संघ परिवार को कड़ी चेतावनी देते हुए सतर्क रहने को कहा। उन्होंने इन संगठनों पर पाखंडी नाटक रचने का आरोप लगाया। हल्द्वानी की घटना का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी की यह मानसिकता लोकतांत्रिक भावना को ठेस पहुंचाने वाली और संवैधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है।
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