यूजीसी एक्ट 2026 की बहाली के लिए संघर्ष रहेगा जारी, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा

प्रयागराज में जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन; प्रो. विक्रम और डॉ. कमल उसरी ने यूजीसी एक्ट 2026 को बताया सामाजिक न्याय के लिए जरूरी।
प्रयागराज में UGC Act 2026 के समर्थन में प्रदर्शन।
प्रयागराज में UGC Act 2026 के समर्थन में प्रदर्शन।
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इलाहाबाद (प्रयागराज) | इलाहाबाद में आज सैकड़ों की संख्या में लोगों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी एक्ट 2026 के समर्थन में राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। इस दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्थगनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन एक्ट की पूर्ण बहाली होने तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

"यूजीसी एक्ट का विरोध करने वाले घोर जातिवादी": प्रो. विक्रम

सभा को संबोधित करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. विक्रम ने विरोधियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट 2026 का विरोध करने वाले लोग घोर जातिवादी मानसिकता से ग्रसित हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा, "हमने छात्र जीवन और अध्यापन के दौरान जातिवाद की पीड़ा को सहा है। साम्प्रदायिक राजनीति के लिए हमें हिंदू बताकर वोट लिया जाता है, लेकिन जब हक, सम्मान और बराबरी की बात आती है, तो हमें एससी/एसटी और ओबीसी में बांट दिया जाता है।"

प्रो. विक्रम ने विरोधियों को 'जातिवादी' कहा
प्रो. विक्रम ने विरोधियों को 'जातिवादी' कहा

शहादतों से प्राप्त हुआ है यह अधिकार: डॉ. कमल उसरी

चर्चित मजदूर नेता और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कमल उसरी ने कहा कि यूजीसी एक्ट 2026 कोई साधारण कानून नहीं है, बल्कि यह रोहित वेमुला, डॉ. पायल ताडवी और दर्शन सोलंकी जैसे हजारों छात्रों की शहादत का परिणाम है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की कमजोर पैरवी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्थगनादेश दिया है, जिसके खिलाफ वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

यूजीसी एक्ट 2026 के समर्थन में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौपा गया.
यूजीसी एक्ट 2026 के समर्थन में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौपा गया.

राष्ट्रपति से संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग

राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि यूजीसी संबंधी यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 21 और 46 के तहत वंचित वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों के संरक्षण के लिए आवश्यक है। ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं:

  • यूजीसी एक्ट 2026 को संविधान की भावना के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

  • उच्च शिक्षा संस्थानों में OBC/SC/ST छात्रों के उत्पीड़न पर त्वरित और कठोर कार्रवाई हो।

  • कानून के विरुद्ध हो रहे भ्रामक और असंवैधानिक विरोध पर रोक लगाई जाए।

  • शिक्षा प्रशासन में सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा को मुख्य आधार बनाया जाए।

सैकड़ों कार्यकर्ताओं की रही उपस्थिति

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से अधिवक्ता धीरेंद्र यादव, राम धीरज मौर्य, अजीत चौधरी, बसंत लाल, डॉ. आर.के. वर्मा, प्रेमचंद यादव, मंजू वर्मा, एस.आर. मौर्य, विवेक राणा सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सामाजिक न्याय और समानता की स्थापना के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।

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