
सहारनपुर/मेरठ: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग के मामले को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यहाँ एक बीएएमएस (BAMS) के प्रथम वर्ष के छात्र की सड़क हादसे में मौत हो गई, लेकिन मृतक के परिवार और साथी छात्रों ने इसे महज एक दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया है। उनका आरोप है कि छात्र की हत्या की गई है और उसे हादसे की शक्ल दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
मृतक की पहचान 25 वर्षीय विशाल गौतम के रूप में हुई है, जो दिल्ली के बुध विहार फेज-1 के निवासी थे और एक दलित परिवार से ताल्लुक रखते थे। विशाल ने महज एक महीने पहले ही गुरु द्रोणाचार्य आयुर्वेदिक इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया था और वे कैंपस के हॉस्टल में ही रहते थे।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की देर शाम विशाल अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। तभी संस्थान से करीब 500 मीटर की दूरी पर, खुशलीपुर गांव के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। सिर में गंभीर चोटें आने के कारण विशाल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके साथी छात्र को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रैगिंग और साजिश के गंभीर आरोप
विशाल की मौत की खबर मिलते ही उनके परिजन और भीम आर्मी के सदस्य मौके पर पहुँच गए और कॉलेज कैंपस के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
विशाल के पिता, पाटे बहादुर, ने कॉलेज प्रशासन और सीनियर छात्रों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है, "दाखिले के बाद से ही मेरे बेटे को सीनियर्स द्वारा परेशान किया जा रहा था। उसकी रैगिंग ली जा रही थी। उसने कई बार इसकी शिकायत भी की, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।"
पिता ने आगे आरोप लगाया कि आरोपी छात्र विशाल को जबरन बाइक पर ले गए, उसके फोन के साथ छेड़छाड़ की और साजिशन उसकी हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने उनसे संपर्क तोड़ लिया और स्टाफ गायब हो गया।
पुलिस कार्रवाई और जांच
परिजनों के आक्रोश और शिकायत के बाद, पुलिस ने सोमवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 छात्रों—मोहित, हर्ष, हर्षित, आसिफ, शिवम और मोनू पंडित—और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल इस मामले में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं नहीं लगाई गई हैं।
जांच के दायरे में कॉलेज स्टाफ
बिहारीगढ़ के एसएचओ अक्षय शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, "एफआईआर में रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। हम गवाहों के बयानों, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर इन दावों की सच्चाई परख रहे हैं।"
वहीं, एसपी (देहात) सागर जैन ने बताया, "शुरुआती सबूत एक सड़क हादसे की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन हम सभी आरोपों की गहनता से जांच कर रहे हैं। कॉलेज स्टाफ और छात्रों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और सीसीटीवी फुटेज के जरिए टक्कर मारने वाले वाहन का पता लगाया जा रहा है।"
फिलहाल कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर कैंपस सुरक्षा और रैगिंग विरोधी कानूनों के पालन पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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