TCS नासिक यौन उत्पीड़न मामला: एफआईआर में जुड़ी SC/CT धाराएं, सीएम फडणवीस ने दिए सख्त जांच के आदेश

टीसीएस नासिक विवाद: मुख्यमंत्री फडणवीस के सख्त निर्देश और एफआईआर में नई धाराओं के जुड़ने से बढ़ी आरोपियों की मुश्किलें।
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नई दिल्ली: नासिक पुलिस ने टीसीएस मामले में गिरफ्तारियों का कारण बनी पहली एफआईआर में एक और गंभीर आरोप जोड़ा है। दानिश शेख के खिलाफ 26 मार्च को दर्ज एफआईआर संख्या 156 में शुरुआत में दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप थे। अब 31 मार्च को इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएं भी शामिल कर दी गई हैं। पुलिस के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि शिकायतकर्ता महिला एससी समुदाय से ताल्लुक रखती है।

शुक्रवार को कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मॉड्यूल की गहनता से जांच की जा रही है ताकि इसके गहरे संबंधों का पता लगाया जा सके। मामले की तह तक जाने के लिए जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीसीएस ने घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए इसकी निंदा की है और कंपनी जांच में पूरा सहयोग कर रही है।

मामले में टीसीएस कर्मचारी निदा खान को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। निदा के वकील बाबा सैयद ने एक प्रमुख समाचार पत्र को बताया कि वह जल्द ही उनकी ओर से अग्रिम जमानत याचिका दायर करेंगे। वकील ने निदा को 'मीडिया ट्रायल का शिकार' बताते हुए दावा किया कि वह गर्भवती है और उसका परिवार उसके स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित है।

नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने निदा की कथित भूमिका पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि अब तक किसी अन्य एफआईआर में उसका नाम सामने नहीं आया है और वह कंपनी में एचआर नहीं बल्कि एक एसोसिएट थी। कार्णिक के मुताबिक, देशभर में दर्ज किसी भी मामले में निदा का अन्य आरोपियों से कोई संबंध नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ने कुछ आरोपियों के प्रतिबंधित समूहों से जुड़े होने के दावों की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों से भी संपर्क किया है।

इस मामले में दर्ज सभी नौ एफआईआर के विश्लेषण से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इनमें से आठ मामलों में यौन उत्पीड़न के आरोप हैं, जबकि पांच में धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायतें दर्ज हैं। कम से कम तीन मामलों में पीड़िताओं ने दावा किया है कि पुलिस के पास जाने से पहले उन्होंने कंपनी के भीतर भी अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।

नौ एफआईआर में कुल आठ आरोपियों के नाम हैं। इनमें से पांच- दानिश शेख, निदा खान, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अंसारी टीसीएस की नासिक शाखा में एसोसिएट थे। रज़ा मेमन और तौसीफ अत्तार को शिकायतकर्ताओं ने टीम लीडर बताया है। पुणे स्थित ऑपरेशंस मैनेजर अश्विनी चैनानी एकमात्र वरिष्ठ कर्मचारी हैं, जिन पर आरोपियों को उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि शिकायतें मिलने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे आरोपियों के हौसले बुलंद हुए।

इन आठ आरोपियों में से तौसीफ अत्तार का नाम छह एफआईआर में और रज़ा मेमन का नाम पांच में दर्ज है। ये सभी शिकायतें मार्च 2026 के अंत और अप्रैल 2026 की शुरुआत में महज तीन दिनों के भीतर देवलाली कैंप और मुंबई नाका पुलिस स्टेशनों में दर्ज कराई गई थीं।

कुछ आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील बाबा सैयद ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मजाक में कही गई बातों को गलत संदर्भ में पेश किया गया है और व्यक्तिगत सहमति से किए गए कार्यों को पुलिस द्वारा अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है।

पहली एफआईआर और दानिश शेख की भूमिका

एफआईआर 156 की शिकायतकर्ता ने बताया है कि उसकी मुलाकात जनवरी 2022 में दानिश शेख से हुई थी। दानिश ने खुद को टीसीएस कर्मचारी बताकर उसे वहां नौकरी दिलाने की पेशकश की थी। आरोप है कि जुलाई 2022 में उसने नासिक के एक पर्यटन स्थल पर शादी का वादा करके पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की।

डिग्री पूरी होने के बाद पीड़िता ने दानिश की सलाह पर टीसीएस में आवेदन किया और उसका चयन हो गया। उसने आरोप लगाया कि नौकरी शुरू करने के बाद उसका, दानिश, तौसीफ अत्तार और निदा खान का एक समूह बन गया। इसी दौरान इन तीनों ने हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और इस्लाम को श्रेष्ठ धर्म बताया।

पीड़िता का आरोप है कि अगस्त 2024 में दानिश उसे त्र्यंबक रोड स्थित एक रिसॉर्ट में ले गया और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। जब यह बात तौसीफ को पता चली, तो उसने पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने परिवार को सब बताने की धमकी देकर यौन मांगें पूरी करने का दबाव डाला और ऑफिस की लॉबी व पैंट्री में उसे परेशान करने लगा। फरवरी 2026 में दानिश की पत्नी ने पीड़िता से संपर्क कर बताया कि उनके दो बच्चे हैं, जिसके बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

एफआईआर 156 के अलावा दानिश शेख एक अन्य एफआईआर में भी आरोपी है। इसमें तौसीफ, शाहरुख और रज़ा पर एक पुरुष सहकर्मी को निशाना बनाने का आरोप है। उन्होंने हिंदू देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाए, उसे अपनी डेस्क पर इस्लामी प्रार्थना करने के लिए मजबूर किया और शाकाहारी होने के बावजूद उसे मांसाहारी भोजन खाने के लिए धमकाया। पीड़ित के यह कहने पर कि उसके बच्चे नहीं हैं, दानिश और तौसीफ ने उसे अपनी पत्नी उनके पास भेजने का भद्दा सुझाव भी दिया।

निदा खान, तौसीफ अत्तार और रज़ा मेमन पर लगे आरोप

निदा खान का नाम केवल एफआईआर 156 में दर्ज है। उस पर हिंदू देवता का अपमान करने और उस समूह का हिस्सा होने का आरोप है जिसने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां की थीं।

छह एफआईआर में नामजद तौसीफ अत्तार पर यौन उत्पीड़न, शारीरिक हमले और धार्मिक रूप से डराने-धमकाने के गंभीर आरोप हैं। उस पर एक महिला सहकर्मी के करीब आने के लिए पेशेवर मौकों का फायदा उठाने, अश्लील इशारे करने और गर्भपात का शिकार हुई एक महिला पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। इसके अलावा, उसने सहकर्मियों को इस्लाम अपनाने की सलाह दी, एक पुरुष कर्मचारी को जबरन टोपी पहनाकर घर पर नमाज पढ़ने को कहा और ऑफिस डेस्क पर इस्लामी प्रार्थना करवाई।

टीम लीडर रज़ा मेमन पर गुड़ी पड़वा के दिन ऑफिस की लॉबी में एक शिकायतकर्ता की साड़ी का पल्लू खींचने और महिला कर्मचारियों को गलत तरीके से छूने का आरोप है। वह उनके हनीमून और निजी जिंदगी के बारे में घुसपैठ वाले सवाल पूछता था। वह एक शादीशुदा कर्मचारी को "प्लेयर" बुलाता था और महिलाओं की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करता था। धारा 299 के तहत उस पर एक पुरुष सहकर्मी को इस्लाम कबूल करने की सलाह देने का भी आरोप है, जिसमें उसने दावा किया था कि सहकर्मी के पिता का लकवा केवल धर्म परिवर्तन से ही ठीक होगा।

कानूनी धाराएं और कंपनी की आंतरिक विफलता

नौ में से आठ एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 के तहत यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। इनमें गलत तरीके से छूना, अश्लील टिप्पणियां करना, घूरना और अनुचित व्यवहार शामिल है। पांच मामलों में धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) लगाई गई है। पहली एफआईआर 156 में धारा 69 (छल से यौन संबंध बनाना) भी लागू की गई है, जिसमें दानिश मुख्य आरोपी है।

एफआईआर में ऐसे चार मामलों का भी जिक्र है जहां पीड़ितों ने पुलिस के पास जाने से पहले आंतरिक रूप से शिकायत की थी। एक मामले में पीड़िता ने ट्रेनिंग मैनेजर और ऑपरेशंस हेड अश्विनी चैनानी से बार-बार शिकायत की। आरोप है कि चैनानी ने उल्टा पीड़िता से कहा, "तुम सुर्खियों में क्यों आना चाहती हो? इस मामले को यहीं छोड़ दो।"

एक अन्य मामले में ईमेल के जरिए औपचारिक शिकायत करने पर आरोपी शफी शेख का तबादला दूसरे सेक्शन में कर दिया गया। एक पुरुष कर्मचारी ने अत्तार द्वारा उस पर पंखा फेंकने की शिकायत चैनानी से की थी, लेकिन कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह, शफी शेख के व्यवहार की शिकायत टीम लीडर रज़ा मेमन (जो खुद एक आरोपी है) से की गई, तो उसने दोनों को केबिन में बुलाकर कोई आगे की कार्रवाई नहीं की।

कई पीड़ितों ने डर के कारण आंतरिक रूप से शिकायत दर्ज नहीं कराई। उन्हें लगा कि वरिष्ठ अधिकारी आरोपियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे, इसलिए उनकी बात अनसुनी कर दी जाएगी। कुछ को नौकरी जाने का डर था, जबकि एक कर्मचारी को लगा कि कंपनी में आरोपियों के दबदबे के कारण वह किसी से शिकायत नहीं कर सकती।

टीसीएस का आधिकारिक बयान और जांच

टीसीएस ने पहले कहा था कि उनके पास कानून के मुताबिक 'पॉश' (POSH) समिति मौजूद है, लेकिन उन्हें इस मुद्दे पर कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी। अब कंपनी ने अपने स्तर पर भी मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

टीसीएस के सीईओ और एमडी के. कृतिवासन ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया। उन्होंने बताया कि कंपनी ने डेलॉइट और एक प्रमुख लॉ फर्म ट्राईलीगल की विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए स्वतंत्र वकील के रूप में नियुक्त किया है। यह आंतरिक जांच टीसीएस की अध्यक्ष और सीओओ आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में की जा रही है।

कंपनी ने स्वतंत्र निदेशक केकी मिस्त्री की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति भी गठित की है। जांच के निष्कर्ष इसी समिति के सामने रखे जाएंगे और उन्हीं की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। टीसीएस ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रेस में जिस निदा खान को बार-बार एचआर मैनेजर बताया जा रहा है, वह न तो एचआर है और न ही भर्ती प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है।

वह केवल एक प्रोसेस एसोसिएट के रूप में काम करती थी और उसके पास कोई नेतृत्व जिम्मेदारी नहीं थी। कंपनी ने नासिक यूनिट बंद होने की मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से भ्रामक और झूठा बताते हुए कहा है कि वहां ग्राहकों को सेवाएं देना निरंतर जारी है।

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