
नई दिल्ली: मैट्रिमोनियल और डेटिंग साइट्स के जरिए महिलाओं को प्यार के जाल में फंसाने वाले एक शातिर ठग की सच्चाई सामने आई है। 35 वर्षीय आनंद कुमार ने पिछले दो सालों में करीब 500 महिलाओं को अपना शिकार बनाया है। पुलिस के मुताबिक, यह आरोपी कभी डॉक्टर, कभी इंजीनियर तो कभी बिजनेसमैन बनकर महिलाओं से दोस्ती करता था।
फर्जी नाम और झूठी नौकरी की प्रोफाइल बनाकर आनंद सबसे पहले महिलाओं का भरोसा जीतता था। रिश्ते में गहराई आने के बाद वह उन्हें झांसे में लेकर उनकी निजी और आपत्तिजनक तस्वीरें मांग लेता था।
तस्वीरें हासिल करने के बाद उसकी ठगी का असली खेल शुरू होता था। वह किसी 'इमरजेंसी' का बहाना बनाकर पैसों की मांग करता था। अगर कोई महिला पैसे देने से इनकार करती, तो वह उनकी निजी तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता था। पैसे ऐंठने के बाद वह अचानक उनका नंबर ब्लॉक करके गायब हो जाता था।
इस शातिर अपराधी का भांडा तब फूटा जब एक 30 वर्षीय महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि एक मैट्रिमोनियल साइट पर उसकी मुलाकात वैभव अरोड़ा नाम के शख्स से हुई थी, जिसने उससे 7 लाख रुपये ठग लिए। जब 15 दिनों तक वैभव से उसकी कोई बात नहीं हुई, तो उसके एक दोस्त ने फोन पर बताया कि वैभव की मौत हो चुकी है।
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि आरोपी ने खुद को एक बेहद संभ्रांत और प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में पेश किया था। भरोसा जीतने के बाद उसने इंस्टाग्राम और फिर व्हाट्सएप पर कई अलग-अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके महिला से बातचीत शुरू की।
असल में आनंद ही 'वैभव' का भेष धरकर बात कर रहा था। पुलिस के अनुसार, उसने इंस्टाग्राम से किसी अनजान व्यक्ति की तस्वीरें उठाकर अपनी फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। दिसंबर में उसकी शिकायतकर्ता से बातचीत शुरू हुई और वह महिला उसके बुने हुए जाल में पूरी तरह फंस गई।
वैभव बनकर बात करने वाले इस ठग ने कभी अपना चेहरा नहीं दिखाया। जब भी महिला उसे वीडियो कॉल करती, तो वह किसी जरूरी मीटिंग में होने या परिवार के आसपास होने का बहाना बनाकर चेहरा छिपा लेता था।
जनवरी के अंत में इस पूरी कहानी में एक नया मोड़ आया। महिला के पास एक वीडियो कॉल आई, जिसमें सामने वाले ने अपना नाम आनंद बताया। चूंकि महिला ने असली वैभव को कभी नहीं देखा था, इसलिए उसने आनंद को ही वैभव का सच्चा दोस्त मान लिया।
कॉल पर आनंद ने महिला को बताया कि वैभव की मां बहुत बीमार है और उसके व्यापार में भारी नुकसान हुआ है। उसने इस मुश्किल वक्त में आर्थिक मदद की गुहार लगाई। महिला ने उसकी बातों में आकर तुरंत 15,000 रुपये भेज दिए।
इसके बाद वैभव के नंबर से भी कॉल आई जिसमें उसने और पैसों की मांग की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जनवरी तक पीड़िता ने इस शातिर ठग को लगभग 7 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे।
पैसे मिलने के बाद आरोपी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर महिला के फोन और मैसेज को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। जब महिला ने 'वैभव' से मिलने की जिद की, तो आनंद ने फिर से दोस्त बनकर उसे फोन किया और यह झूठी खबर दी कि वैभव इस दुनिया में नहीं रहा। परेशान होकर महिला ने आखिरकार पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया और पश्चिम बंगाल में दो सक्रिय नंबरों को ट्रेस किया। एक सुनियोजित छापेमारी के बाद अंततः आनंद को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने उसके पास से चार स्मार्टफोन, आठ सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और ठगी के पैसों से खरीदे गए सोने के आभूषण बरामद किए हैं। उसके फोन की जांच करने पर कई अलग-अलग राज्यों की पीड़ित महिलाओं के साथ की गई उसकी बातचीत का भी खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, आनंद एक आदतन अपराधी है और वह पहले भी दिल्ली तथा गाजियाबाद में कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस गिरोह में आनंद का कोई और साथी भी शामिल था और कितनी अन्य महिलाएं इस धोखाधड़ी का शिकार हुई हैं।
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