
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले 30 वर्षीय अब्दुल कलाम को मंगलवार देर रात एक ऐसा काम सौंपा गया, जो उनकी दिनचर्या का हिस्सा नहीं था। उनके ठेकेदार तौफीक ने उन्हें हरियाणा में नूंह के फिरोजपुर झिरका स्थित व्यस्त अंबेडकर चौक पर एक सीवर साफ करने का निर्देश दिया। कलाम मुख्य रूप से सीवर लाइन बिछाने वाले मजदूर थे, न कि सफाईकर्मी। उनके 55 वर्षीय पिता जमशेद, जो पेशे से किसान हैं, बताते हैं कि बिना ज्यादा सोचे-समझे उनका बेटा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उस गहरे सीवर में उतर गया।
इससे कुछ ही मिनट पहले उनके दोस्त और 27 वर्षीय सफाईकर्मी राजेंद्र कुमार भी कथित तौर पर ठेकेदार के निर्देश पर ही उस 25 फुट गहरे नाले की सफाई के लिए उतरे थे। जब काफी देर तक राजेंद्र बाहर नहीं आए, तो अब्दुल उन्हें बचाने और बाहर निकालने की कोशिश में उस सीवर के अंदर चले गए।
दुर्भाग्य से दोनों में से कोई भी जीवित वापस नहीं लौट सका। जहरीली गैसों की चपेट में आने से दोनों वहीं बेहोश हो गए और जब तक वहां मदद पहुंचती, तब तक उनकी जान जा चुकी थी।
इस दर्दनाक घटना के दौरान 28 वर्षीय मोहम्मद अरबाज नामक एक तीसरा मजदूर रस्सी के सहारे अंदर गया था। वह किसी तरह खुद जिंदा बाहर निकलने में सफल रहा। पुलिस के अनुसार, अस्पताल में इलाज के बाद उसे गुरुवार को छुट्टी दे दी गई है।
अब्दुल के पिता जमशेद के मुताबिक, उनका बेटा ईद के बाद करीब एक महीने पहले ही नूंह लौटा था। वह अपने पीछे सहारनपुर में पत्नी, छह महीने की बेटी और दो साल का बेटा छोड़ गया है। सात बहनों के परिवार में अब्दुल उनका इकलौता भाई था।
मृतकों के परिवारों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर, बुधवार दोपहर सिटी फिरोजपुर झिरका पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (लापरवाही से मौत) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह एफआईआर ठेकेदार, संबंधित कनिष्ठ अभियंता (जेई) और उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल ठेकेदार फरार है और इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
हरियाणा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया गया है और गुरुवार को उप-मंडल अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतें मिलने के बाद चार महीने पहले ठेकेदार को सीवर से गाद निकालने का टेंडर दिया गया था। सरकारी नीति के अनुसार ठेकेदार को मृतकों के परिवारों को मुआवजा देना होगा और इस घोर लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर सुरक्षा उपकरणों की गैर-मौजूदगी की पुष्टि की है। फिरोजपुर झिरका के उप-मंडलाधिकारी लक्ष्मी नारायण, सब-इंस्पेक्टर शिव प्रकाश और पीएचईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि वहां कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। लक्ष्मी नारायण ने बताया कि वह घटना के तुरंत बाद वहां पहुंचे थे और मजदूरों के पास कोई सुरक्षा गियर नहीं था, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सहायक उप-निरीक्षक कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर काम करवाया। उन्होंने बताया कि अंबेडकर जयंती के राज्यव्यापी अवकाश के दिन उन्हें काम पर बिल्कुल नहीं होना चाहिए था, वह भी बिना जरूरी उपकरणों के। पुलिस ने आरोपियों को जांच में शामिल होने के लिए आधिकारिक नोटिस भेज दिए हैं।
गुरुवार को जब इस घटनास्थल का मुआयना किया गया, तो देखा गया कि स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा के मद्देनजर उस खुले नाले को लकड़ी के मोटे लट्ठों से ढक दिया था।
घटनास्थल के पास गन्ने के रस की दुकान चलाने वाले 35 वर्षीय यासीन खान ने आंखों देखा हाल बयां किया। उन्होंने बताया कि जब पहला मजदूर काफी देर तक बाहर नहीं आया, तो दूसरा बिना किसी रस्सी या सुरक्षा गियर के अंदर चला गया। जल्द ही उसके चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। इसके बाद लोगों ने एक रस्सी का इंतजाम किया और तीसरे मजदूर ने अंदर जाकर अब्दुल को बाहर निकाला। यासीन के मुताबिक, यह ठेकेदार की ओर से बरती गई पूरी तरह से घोर लापरवाही का मामला है।
नाले के बगल में दुकान चलाने वाले 20 वर्षीय मोहम्मद समीर ने भी इस बात पर जोर दिया कि उन बेबस मजदूरों के पास कोई सेफ्टी मास्क, रस्सी या अन्य जरूरी गियर नहीं था।
बचाव कार्य के लिए अंततः एक अर्थमूवर (जेसीबी) मशीन भी वहां लाई गई थी। चौराहे के पास पुलिस चौकी पर ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड मुकेश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंच गए थे और मशीन भी बुलवा ली गई थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अब्दुल कलाम के परिवार के लिए यह दुख अब गुस्से में बदल चुका है। बुधवार को अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने वाले जमशेद ने रुंधे गले से कहा कि ठेकेदार एक बार भी उनसे या परिवार से मिलने नहीं आया। उन्होंने कहा कि वे अब केवल न्याय चाहते हैं, क्योंकि अब उन्हें कलाम के पीछे छूटे छोटे बच्चों के भविष्य के बारे में भी सोचना है।
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