
नई दिल्ली। 'ऑनर किलिंग' के खौफ साये में जी रहे एक अंतरजातीय जोड़े को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें महिला के माता-पिता को इस जोड़े से मिलने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने यह अहम कदम जोड़े की उस आशंका के बाद उठाया, जिसमें उन्होंने अपने साथ किसी अनहोनी का गहरा डर जताया था।
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इससे पहले भी इस जोड़े को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है, जब उन्होंने महिला के परिजनों और रिश्तेदारों से अपनी जान को खतरा होने की शिकायत की थी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें इस तरह के रूढ़िवादी तत्वों को बिल्कुल भी बढ़ावा नहीं देना चाहिए। अदालत ने कहा कि वे लोग वहां इस जोड़े को परेशान कर रहे हैं और यह किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। इस तल्ख टिप्पणी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई के लिए तय कर दी है।
अदालत में महिला के माता-पिता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि हाईकोर्ट का इरादा सिर्फ पिता और बेटी के बीच एक सामान्य मुलाकात कराना था। उनका मकसद किसी भी तरह से जोड़े को मिली सुरक्षा में सेंध लगाना या उसे कम करना नहीं था।
वहीं, जोड़े के वकील ने अदालत के सामने शिकायत दर्ज कराई कि राजस्थान पुलिस के जवान लगातार उनके घर के बाहर तैनात हैं। इतना ही नहीं, पुलिस उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर उनके रिश्तेदारों के घर भी पूछताछ के लिए जा रही है। वकील ने कहा कि उन्हें सुरक्षा तो मिली है, लेकिन राजस्थान पुलिस उनके घर पर ही डेरा डाले बैठी है।
इस पर राजस्थान सरकार के वकील ने पीठ को भरोसा दिलाया कि अब घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी जोड़े के पास नहीं जाएंगे और न ही उन्हें परेशान करेंगे। कोर्ट ने इस बयान को बाकायदा रिकॉर्ड पर लिया और राजस्थान सरकार से जोड़े की याचिका पर विस्तृत जवाब मांगा है।
इससे पहले 30 अप्रैल को भी शीर्ष अदालत ने इस मामले में अहम निर्देश दिए थे। तब उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को लिखित आश्वासन दिया था कि वह जोड़े को पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी। यूपी पुलिस ने बागपत स्थित पति के घर जाकर सुरक्षा का जायजा भी लिया था और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जोड़े को बागपत स्थित उनकी ससुराल में रहने की अनुमति दे दी थी।
गौरतलब है कि इस जोड़े ने इसी साल 20 मार्च को शादी की थी। शादी के तुरंत बाद से ही उन्हें लड़की के परिवार और रिश्तेदारों की तरफ से 'ऑनर किलिंग' की गंभीर धमकियां मिलने लगी थीं। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने पुलिस समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दर-दर भटकने को मजबूर हो गए। अपनी जान की सलामती का कोई और रास्ता न देख अंततः उन्होंने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें