
नई दिल्ली: मणिपुर की राजधानी इम्फाल में सोमवार को एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। शहर के सबसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र, रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के बाहर भारी भीड़ ने डेरा डाल लिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
यह पूरा बवाल तीन घायल कुकी-जो (Kuki-Zo) युवकों को इलाज के लिए इस अस्पताल में लाए जाने के बाद शुरू हुआ। सोमवार सुबह करीब 6 बजे कांगपोकपी जिले में गोलीबारी की एक बड़ी घटना हुई थी, जिसके बाद गोली लगने से घायल हुए इन युवकों को यहां लाया गया था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह मुठभेड़ नागा बहुल गांव कोन्साखुल और कुकी-जो बहुल गांव लेइलोन मुनलुई के बीच के इलाके में हुई। इस इलाके में पिछले कुछ दिनों से पहले ही काफी तनाव बना हुआ है।
दरअसल, 13 मई को कोन्साखुल से छह नागा निवासियों का अपहरण कर लिया गया था और पिछले हफ्ते ही इन सभी के शव बरामद हुए हैं। इस घटना के बाद से दोनों समुदायों के बीच रिश्ते और भी ज्यादा तल्ख हो गए हैं।
अधिकारी ने बताया कि सोमवार सुबह दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में लेइलोन मुनलुई के तीन लोग घायल हुए हैं। उन्हें सेना और सीआरपीएफ (CRPF) की मदद से सुरक्षित निकालकर रिम्स लाया गया क्योंकि गोली लगने से हुए घावों के बेहतर इलाज के लिए केवल यहीं पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं।
कुकी संगठनों ने इन तीनों घायलों की पहचान गेनलेनमांग वैफेई, पुगौलाल और लुनलियानदाव वैफेई के रूप में की है। संगठनों का कहना है कि ये लोग 'ग्राम स्वयंसेवक' हैं। बता दें कि मणिपुर में चल रहे मौजूदा संघर्ष के बीच गांवों की सुरक्षा में तैनात हथियारबंद लोगों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
इम्फाल पश्चिम में स्थित इस केंद्रीय स्वास्थ्य केंद्र में जैसे ही कुकी-जो युवकों के इलाज के लिए लाये जाने की खबर फैली, भारी संख्या में लोगों ने अस्पताल को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों में नागा समुदाय के साथ-साथ कई मैतेई समुदाय के लोग भी शामिल थे। ज्ञात हो कि मैतेई और कुकी-जो समुदाय के बीच मई 2023 से ही हिंसक संघर्ष चल रहा है।
इस जातीय संघर्ष की एक बड़ी खासियत यह रही है कि दोनों समुदायों के लोगों का एक-दूसरे के बहुल क्षेत्रों में जाना लगभग प्रतिबंधित है। इसी वजह से कुकी-जो समुदाय के लोगों का इम्फाल में प्रवेश भी वर्जित सा हो गया है।
अब चूंकि कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच भी तनाव बढ़ने लगा है, इसलिए नागा संगठनों और स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों द्वारा घायल कुकी युवकों को राजधानी लाए जाने का कड़ा विरोध किया। कई प्रदर्शनकारी तो इन घायलों को 'उग्रवादी' तक कह रहे थे।
भीड़ को बेकाबू होता देख सुरक्षाबलों को मोर्चा संभालना पड़ा और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए दोपहर और शाम के वक्त आंसू गैस के गोले दागे गए। इसके बावजूद शाम तक तनाव कम नहीं हुआ और कुछ लोगों ने अस्पताल की ओर जाने वाली सड़क पर टायर जलाकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
इस पूरे घटनाक्रम पर कांगपोकपी स्थित कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी के सदस्य थांगटिनलेन हाओकिप ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एक भयानक और अस्वीकार्य स्थिति बताते हुए कहा कि रिम्स किसी एक खास समुदाय की जागीर नहीं है।
हाओकिप ने आगे कहा कि लोगों का यह कहना कि किसी दूसरे समुदाय का व्यक्ति वहां जाकर अपना इलाज नहीं करा सकता, सीधे तौर पर बीमार और घायल लोगों की जान को खतरे में डालने जैसा है।
वहीं, चुराचांदपुर स्थित कुकी-जो काउंसिल ने भी इस घटना को बेहद परेशान करने वाला करार दिया है। काउंसिल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस तरह की हरकतें उस दर्दनाक धारणा को और पुख्ता करती हैं कि मणिपुर में कुकी-जो समुदाय के लोगों की जान की कोई अहमियत नहीं बची है।
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