
भागलपुर- निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण लागू करने की मांग तेज हो गई है। बिहार विधानसभा के पूर्व विधायक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक फोरम के अध्यक्ष ई. ललन कुमार ने इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के बढ़ते दौर में वंचित वर्गों को सामाजिक न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
ई. ललन कुमार ने विशेष रूप से बिहार के भागलपुर जिले के पिरपैंती में Adani Power Limited द्वारा स्थापित की जा रही 2400 मेगावाट की थर्मल पावर परियोजना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है, लेकिन निजी क्षेत्र होने के कारण SC, ST, OBC और EWS वर्गों के लिए आरक्षण नीति लागू नहीं की जा रही है।
उन्होंने साफ कहा, “जब सरकारी जमीन, अनुदान और अन्य सुविधाएं निजी कंपनियों को दी जाती हैं तो सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना भी अनिवार्य होना चाहिए। बिना आरक्षण के यह विकास अधूरा और अन्यायपूर्ण है।”
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की सोच के अनुरूप सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण नीति लागू की गई थी, लेकिन निजीकरण के बढ़ते दायरे के कारण बंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व लगातार कम होता जा रहा है।
ई. ललन कुमार ने कहा कि यदि यही परियोजना NTPC या NHPC जैसे सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा संचालित होती, तो आरक्षण रोस्टर अनिवार्य रूप से लागू होता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका जैसे देशों में भी "Affirmative Action" के माध्यम से निजी क्षेत्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है।
उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
केंद्र सरकार निजी क्षेत्र में स्पष्ट और बाध्यकारी नीति बनाए।
सभी निजी कंपनियों में SC, ST, OBC एवं EWS वर्गों को जनसंख्या अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाए।
पिरपैंती (भागलपुर) की 2400 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना में तत्काल आरक्षण रोस्टर लागू किया जाए।
जिन परियोजनाओं में सरकारी भूमि, अनुदान या संसाधन दिए गए हैं, वहां आरक्षण अनिवार्य किया जाए।
केंद्र सरकार इस दिशा में एक ठोस कानून (Legislation) बनाए।
ललन कुमार ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर का है। उन्होंने अपील की कि इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।
देश में दवाओं के सुरक्षित भंडारण को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है। ललन कुमार ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस को सख्ती से लागू करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि दवाओं को 15°C से 25°C तापमान पर रखना अनिवार्य है, जबकि अधिकतम 30°C तक की सीमा तय की गई है। इसके बावजूद देश के ज्यादातर सरकारी और निजी दवा गोदामों में इन मानकों का पालन नहीं हो रहा है। कई जगहों पर तापमान नियंत्रण के लिए एसी या हीटर जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और नियमित तापमान मॉनिटरिंग के लिए लॉग बुक भी नहीं रखी जा रही है।
ई. ललन कुमार ने चेतावनी दी कि गलत तापमान पर रखी दवाएं अपनी प्रभावशीलता खो देती हैं, जो सीधे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि सभी दवा भंडारण केंद्रों में WHO गाइडलाइंस के अनुसार तापमान नियंत्रण अनिवार्य किया जाए, हर केंद्र पर नियमित मॉनिटरिंग और लॉग बुक व्यवस्था लागू हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस मुद्दे को संसद और पूरे देश में प्रमुखता से उठाने की अपील की।
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