
उत्तर प्रदेश: सोनभद्र जिले में 23 मार्च को अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने का सपना देख रहीं आठ युवतियों की उम्मीदें उस वक्त टूट गईं, जब उन्हें पता चला कि उनका नाम लाभार्थियों की सूची में नहीं है। दरअसल, रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक क्षेत्र के लिए तय 75 लड़कियों का कोटा पहले ही भर चुका था। इस खुलासे के बाद शादी की तैयारियों में जुटे पीड़ित परिवारों को गहरा सदमा लगा है।
इन परिवारों ने घर पर हल्दी और मेहंदी जैसी विवाह की सभी पारंपरिक रस्में पूरी कर ली थीं। वे सोमवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शामिल होने के लिए उसरौरा स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) परिसर पहुंचे थे। वहां से बैरंग लौटने के बाद, निराश और आक्रोशित परिजनों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।
अधिकारियों को इन परिवारों को शांत कराने और धरना खत्म करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने उन्हें समझाया और आश्वासन दिया कि योजना के अगले चरण में उनकी बेटियों का विवाह पूरे सम्मान के साथ संपन्न करा दिया जाएगा।
इस पूरे मामले पर बुधवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए सोनभद्र के जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह भदौरिया ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि लड़कियों के परिवारों को सूचित कर दिया गया है कि उनके आवेदन खारिज नहीं हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों की सूची में चयन की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और खंड विकास अधिकारी द्वारा पात्रता सत्यापन पूरा होने के बाद ही डेटा निदेशालय को भेजा जाता है।
अधिकारी ने बताया कि इस प्रक्रिया में वीडियो लॉगिंग, बायोमेट्रिक और फेशियल वेरिफिकेशन जैसी चीजें शामिल होती हैं, जिसके बाद ही आवेदक को एक विशेष कोड आवंटित किया जाता है। जब वरिष्ठ अधिकारियों ने इन आठ युवतियों की प्रक्रिया पूरी न होने का कारण पूछा, तो पता चला कि उनकी तहसील से आवेदकों की संख्या पहले ही 200 के पार जा चुकी थी। इन आठ लड़कियों को छोड़कर, 70 अन्य आवेदकों को योजना का लाभ देने के लिए कोड जारी किया जा चुका था।
भदौरिया के अनुसार, वर्तमान में जिले भर में 2,372 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो सभी पात्र आवेदक सामूहिक विवाह के पिछले चरणों में शामिल नहीं हो सके, उन्हें अगले राउंड में शामिल किया जाएगा। अगले बजट के जारी होने के साथ ही, आगामी 20 अप्रैल को फिर से सामूहिक विवाह समारोह आयोजित होने की प्रबल संभावना है।
दूसरी ओर, पीड़ित वर और वधू पक्षों का दावा है कि पात्रता जांच और सत्यापन में सब कुछ सही पाए जाने के बाद ही उन्हें 23 मार्च को समारोह में समय पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। इसी ठोस आश्वासन के कारण उन्होंने हल्दी-मेहंदी की रस्में निभाईं। उनके रिश्तेदार घर पर इकट्ठा होने लगे थे और कुछ परिवारों ने तो शादी के निमंत्रण पत्र भी बांट दिए थे।
मारकुंडी क्षेत्र के रहने वाले रामेश्वर प्रसाद और विनोद जैसे लड़कियों के पिताओं ने अपनी व्यथा जाहिर करते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनकी सारी तैयारियां ब्लॉक अधिकारियों के निर्देशों पर ही आधारित थीं। सत्यापन के लिए उनके घर आए अधिकारियों ने ही उन्हें आश्वस्त किया था कि 23 मार्च को डायट परिसर में उनकी बेटियों की शादी निश्चित रूप से होगी।
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