
नई दिल्ली: पुणे के प्रतिष्ठित इंडियन लॉ सोसाइटी (आईएलएस) लॉ कॉलेज के पांच छात्रों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। संस्थान के ही द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने इन पांचों पर रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता 35 वर्षीय छात्र का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच शुरू हुआ था। उसे केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उसने 20 वर्ष के आसपास की उम्र वाले इन आरोपी छात्रों के शराब पीने की शिकायत कॉलेज प्रशासन से कर दी थी।
इस मामले में शनिवार को पुणे सिटी पुलिस के अंतर्गत आने वाले डेक्कन जिमखाना पुलिस स्टेशन में एक आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, घटना के समय पीड़ित छात्र एलएलबी (LLB) पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहा था।
पुलिस ने आरोपी छात्रों पर सख्त कार्रवाई करते हुए इस मामले में 'महाराष्ट्र रैगिंग निषेध अधिनियम, 1999' के कड़े प्रावधानों को लागू किया है।
जोन 1 के पुलिस उपायुक्त (DCP) कृषिकेश रावले ने इस पुलिस कार्रवाई पर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जांच का मुख्य उद्देश्य घटनाओं के वास्तविक क्रम को स्थापित करना और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की गहराई से पड़ताल करना है।
डीसीपी रावले के अनुसार, पीड़ित छात्र द्वारा दी गई शिकायत अर्जी में उल्लिखित आरोपों की प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद ही यह एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है।
दर्ज एफआईआर के मुताबिक, प्रताड़ना का यह सिलसिला आईएलएस लॉ कॉलेज के हॉस्टल में 6 अक्टूबर 2024 से 25 दिसंबर 2025 के बीच चला। यह विशिष्ट समयावधि पुलिस की रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर दर्ज की गई है।
पीड़ित छात्र ने 6 अक्टूबर 2024 को हॉस्टल परिसर में कुछ छात्रों को शराब पीते हुए देखा था। इसके बाद एक जिम्मेदार छात्र के रूप में उसने तुरंत इसकी जानकारी कॉलेज के संबंधित अधिकारियों को दे दी थी।
इस शिकायत की भनक लगने पर आरोपी छात्रों ने उसे बुरी तरह परेशान करना शुरू कर दिया। उन्होंने हॉस्टल में उसके साथ गाली-गलौज की और जानबूझकर उसके चेहरे पर सिगरेट का धुआं उड़ाया।
प्रताड़ना का यह स्तर यहीं नहीं रुका। आरोपियों ने हिंसक रवैया अपनाते हुए पीड़ित के कमरे के दरवाजे का शीशा तोड़ दिया। इसके अलावा, वे उसे परेशान करने के लिए उसके दरवाजे पर अंडे फेंकते थे और गुटखा खाकर वहीं थूक देते थे।
पीड़ित छात्र का दावा है कि उसने इस लगातार हो रहे दुर्व्यवहार की जानकारी भी संस्थान के अधिकारियों को दी थी। लेकिन, उसकी शिकायत के बावजूद प्रबंधन की तरफ से आरोपी छात्रों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कॉलेज प्रशासन की इस कथित लापरवाही के बाद निराश होकर छात्र ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाया। इस उच्च स्तरीय शिकायत के आधार पर आरोपों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया गया था।
एफआईआर में शिकायतकर्ता ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि इस जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट यूजीसी को सौंप दी थी। बाद में यूजीसी की तरफ से उस रिपोर्ट की एक प्रति उन्हें भी उपलब्ध कराई गई।
छात्र ने अपनी पुलिस शिकायत में स्पष्ट किया है कि जब उसने उस रिपोर्ट का अध्ययन किया, तो उसे वह पूरी तरह से गड़बड़ और एकतरफा लगी। इसी असहमति और न्याय न मिलने की भावना के चलते उसने पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।
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