दलित ईसाइयों को SC का दर्जा दिलाने की मांग: हैदराबाद में जुटे 1000 से अधिक प्रतिनिधि, कांग्रेस पर साधा निशाना

हैदराबाद में 1000 से अधिक प्रतिनिधियों का महामंथन, एससी दर्जे की मांग को लेकर कांग्रेस और 1950 के राष्ट्रपति आदेश पर साधा कड़ा निशाना।
Dalit Rights.
दलित अधिकार(सांकेतिक तस्वीर)
Published on

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने की रणनीति तैयार करने के लिए एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस विशाल जनसभा में दलित पादरियों, ईसाई नेताओं और समुदाय के कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में मुख्य रूप से उस जातीय भेदभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई, जिसका सामना आज भी दलित ईसाई समाज कर रहा है। इस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एससी वर्ग के तहत मिलने वाले लाभों की मांग को एक बार फिर से तेज कर दिया।

मडिगा रिजर्वेशन पोराटा समिति के संस्थापक और अध्यक्ष मंडा कृष्णा मडिगा ने इस अवसर पर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने समुदाय के लोगों से एकजुट होने और अपने अधिकारों के प्रति राजनीतिक जागरूकता पैदा करने की पुरजोर अपील की।

मंडा कृष्णा मडिगा ने अपने संबोधन में कहा कि हमें इंसाफ के लिए एक साथ खड़े होकर लड़ना होगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अनुसूचित जाति की मान्यता हासिल करने के लिए समाज की एकजुटता सबसे अहम शर्त है।

अपने भाषण के दौरान उन्होंने 1950 के राष्ट्रपति आदेश की भी कड़ी आलोचना की और कहा कि इसी आदेश ने दलित ईसाइयों को एससी अधिकारों और लाभों से वंचित किया है। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि लंबे समय तक भारी राजनीतिक समर्थन मिलने के बावजूद यह पार्टी इस समुदाय को न्याय दिलाने में पूरी तरह से विफल रही है।

कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी दोनों तेलुगु राज्यों में दलित ईसाई मतदाताओं के बढ़ते राजनीतिक महत्व की ओर ध्यान आकर्षित किया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर इस समुदाय को चुनाव के समय सही तरीके से लामबंद किया जाए, तो इनकी भारी संख्या किसी भी चुनाव के नतीजों को पूरी तरह से बदलने की ताकत रखती है।

Dalit Rights.
पूर्वोत्तर भारत की वादियों से यरूशलम तक: जानिए कुकी-मिजो से यहूदी बने 'बनेई मेनाशे' समुदाय का 2700 साल पुराना इतिहास
Dalit Rights.
राजस्थान: भिवाड़ी में दलित नाबालिग से पुलिस की बर्बरता, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा
Dalit Rights.
'शिवाजी महाराज थक गए थे': धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान से महाराष्ट्र में भड़का गुस्सा, जूतों-चप्पलों से विरोध!
द मूकनायक की मदद करें

‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.

यहां सपोर्ट करें
The Mooknayak - आवाज़ आपकी
www.themooknayak.com