जयपुर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भिवाड़ी में एक नाबालिग दलित लड़के के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर कानून व्यवस्था बनाए रखने और कमजोर वर्गों की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया है।
कानून व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
जूली ने झिवाणा निवासी नाबालिग लोकेश की पुलिसकर्मियों द्वारा की गई बेरहमी से पिटाई का जिक्र करते हुए इसे बेहद निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह घटना भाजपा के राज में सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, प्रदेश में गरीबों, दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं और अब ये एक बेहद भयानक रूप लेते जा रहे हैं।
सीएम से की सख्त कार्रवाई की मांग
इस पूरी घटना को पुलिस का तानाशाही रवैया बताते हुए टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। जूली ने इसे मानवता पर कलंक बताते हुए कहा कि राज्य में कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो चुका है और पुलिस की कार्यप्रणाली अब बर्बरता की सारी हदें पार कर रही है।
पीड़ित परिवार पर दबाव का आरोप
पुलिस की कथित मारपीट का शिकार हुआ नाबालिग लोकेश इस वक्त अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत काफी गंभीर बनी हुई है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि पीड़ित के परिवार वालों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और पुलिस ने अब तक उनकी शिकायत भी औपचारिक रूप से दर्ज नहीं की है।
पुलिस अधीक्षक से की बातचीत
इस अमानवीय कृत्य की गंभीरता को देखते हुए जूली ने भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से फोन पर बातचीत की और उन्हें हालात की नाजुकता से अवगत कराया। इसके अलावा, उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों से भी फोन पर संपर्क कर उन्हें सांत्वना और हर संभव मदद का भरोसा दिया।
रक्षक ही बन गए हैं भक्षक
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो ऐसे में आम आदमी न्याय के लिए कहां जाए। जूली का दावा है कि भाजपा के शासन में दलितों, गरीबों और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं अब रोजमर्रा की बात हो गई हैं।
हिरासत में मौतों के आंकड़े चिंताजनक
उन्होंने प्रशासन के उदासीन रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य में अपराध और दमन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए जूली ने बताया कि साल 2025 से 15 मार्च 2026 के बीच राजस्थान में पुलिस हिरासत (कस्टोडियल डेथ) में मौतों के 18 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पूरे देश में बिहार के बाद सबसे ज्यादा हैं।
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