
पुणे- एक महिला को उसके स्वास्थ्य और फॅमिली प्रोब्लेम्स को दूर करने की आड़ में एक स्वयंभू गुरु ना जाने उसको कैसे कैसे पंद्रह सालों तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देता रहा। पन्द्रह साल तक पीडिता ने चुप्पी साधे रखी। न तो वह अपनी पीड़ा बयां कर पाई और न ही अपने परिवार को समझा पाई कि वह किस नर्क से गुजर रही है। आखिरकार उसने हिम्मत जुटाई और भाग निकली, जहां उस ढोंगी गुरु ने उसे अपनी इच्छा का खिलौना बना रखा था। उसने कमरे में लगे CCTV कैमरे तोड़ दिए और अपनी जान बचाई।
यह कहानी है पुणे की 41 वर्षीय महिला की, जो एक प्रतिष्ठित कंपनी में काम करती है। बुधवार तड़के करीब 2 बजे पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने वाघोली के उबलेनगर स्थित एक बंगले से स्वयंभू गुरु राधामोहन मिश्रा (59) और उसके सात सहयोगियों जिनमें छह महिलाएं शामिल हैं, को गिरफ्तार किया। आरोप है कि मिश्रा ने महिला को स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं के निराकरण के बहाने 15 वर्षों तक यौन शोषण किया और उससे ठगी की।
पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने मीडिया को बताया कि आरोपी गुरु राधामोहन मिश्रा मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है और पिछले आठ साल से पुणे में रहकर इस बंगले में आश्रम चला रहा था। पीड़िता भी हरियाणा की मूल निवासी है और उसके पिता डॉक्टर हैं।
वह उस गुरु के संपर्क में तब आई, जब उसके पिता गुरु के एक सहयोगी कंवल नयन से मिलने गए थे। धीरे-धीरे, उसके परिवार के सदस्य गुरु के समर्पित अनुयायी बन गए।
पुलिस आयुक्त ने बताया, "मिश्रा ने खुद को ईश्वरीय अवतार बताया और पीड़िता को शारीरिक, यौन और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने बार-बार उसका यौन शोषण किया, उसे अपना पेशाब पीने के लिए मजबूर किया, बिजली के झटके दिए, उससे अपने पति को तलाक देने को कहा और उसकी संपत्ति अपने नाम करा ली।"
मिश्रा और उसके साथियों ने उस महिला और कई अन्य अनुयायियों को यकीन दिलाया कि वह भगवान का अवतार है और महिला को अपना पेशाब पीने पर मजबूर किया। उन सालों के दौरान उसने महिला से चोरी भी करवाई ताकि वह खुद को और अपने आश्रम को अमीर बना सके।
गुरु ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों को भी अपने जाल में फंसा लिया था। पुलिस आयुक्त के अनुसार, "उसने उनके विश्वास का फायदा उठाया और उन्हें महिला के खिलाफ कर दिया। उसने पीड़िता को बेईमान बताकर परिवार को भ्रमित किया कि उसे 'सुधार' की जरूरत है।"
पीड़िता जब भी परिवार के सामने अपनी पीड़ा बताती, तो उसे कोई सुनने वाला नहीं था। गुरु ने परिवार को यकीन दिला दिया था कि महिला झूठ बोल रही है और उसे 'अनुशासन' की जरूरत है।
पुलिस के अनुसार, महिला पर लगातार नजर रखी जाती थी। उसके कमरे में CCTV कैमरे लगाए गए थे। जब उसने गुरु के प्रभाव से बाहर निकलने के लिए शादी करने का फैसला किया, तो मिश्रा ने उसकी शादी मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए कई शर्तों के साथ करवाई। उसने महिला को शादी से पहले भाग जाने का निर्देश दिया, जिससे उसके परिवार के साथ उसके रिश्ते खराब हो गए।
इसके बाद गुरु ने महिला और उसके पति की निजी वीडियो मांगी और उनके जरिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने महिला को उसके पति से अलग होने के लिए मजबूर कर दिया। आखिरकार महिला ने हिम्मत जुटाई और अपने कमरे में लगे सभी CCTV कैमरे तोड़ दिए। फिर वह आश्रम (उबलेनगर बंगला) से भागकर अपने मायके पहुंची। जब उसने अपने परिवार को सारी सच्चाई बताई, तो परिवार का अंध विश्वास चकनाचूर हो गया। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने बंगले पर छापा मारा और मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उपायुक्त (अपराध) तेजस्वी सतपुते ने बताया कि खराड़ी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को 20 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
बंगले से पुलिस ने 19 हार्ड डिस्क, 12 लैपटॉप, एक टैबलेट, 11 मोबाइल फोन, DVDs, CDs, 23 पेन ड्राइव, 15 लाख रुपये के जेवरात, 6.5 लाख रुपये नकद और 10 गोलियां बरामद की हैं।
जांच में खुलासा हुआ कि मिश्रा ने आश्रम में एक भूमिगत सुरंग बनाने की योजना बनाई थी, जिससे वह किसी आपात स्थिति में भाग सके। सुरंग का काम चल रहा था।
पब्लिक प्रॉसीक्यूटर विजय कदम ने अदालत को बताया कि मिश्रा ने पीड़िता की अश्लील वीडियो बनाई थीं। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों की हिरासत मांगी। पुणे पुलिस आयुक्त ने बताया कि मिश्रा के उत्तर भारत के कई राज्यों और महाराष्ट्र में अनुयायी थे। ये लोग नियमित रूप से उससे मिलने आते थे। गुरु महिलाओं को पारिवारिक, स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याओं का समाधान करने का वादा करके बंगले में बुलाता था और फिर उनका यौन शोषण करता था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आपराधिक साजिश और महाराष्ट्र मानव बलि एवं अन्य अमानवीय, क्रूर व अघोरी प्रथाओं एवं जादू-टोना निषेध अधिनियम की धाराएं लागू की हैं।
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