
नुआगांव (ओडिशा): समाज में बदलाव की एक सुखद तस्वीर ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से सामने आई है। नुआगांव के एक आंगनवाड़ी केंद्र में पिछले तीन महीनों से चला आ रहा जातिगत दीवार आखिरकार सोमवार को टूट गई। प्रशासन की लगातार कोशिशों और समझाइश के बाद, ग्रामीणों ने पुरानी रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए अपने बच्चों को वापस आंगनवाड़ी भेजना स्वीकार कर लिया है।
तीन महीने बाद लौटी रौनक
दरअसल, यह पूरा मामला एक दलित सहायिका-सह-रसोइया (हेल्पर-कम-कुक) की नियुक्ति से जुड़ा था। 20 नवंबर को जब 21 वर्षीय शर्मिष्ठा सेठी ने इस पद पर कार्यभार संभाला, तब से ही गांव के कुछ लोगों ने केंद्र का अघोषित बहिष्कार कर रखा था। हालात यह थे कि तीन महीने तक यहां बच्चों की उपस्थिति शून्य रही। यहां तक कि तीन साल से कम उम्र के बच्चों के माता-पिता और धात्री माताओं ने भी केंद्र से मिलने वाला राशन लेना बंद कर दिया था।
हालांकि, सोमवार का दिन एक नई सुबह लेकर आया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद, आंगनवाड़ी में पंजीकृत 3 से 6 वर्ष की आयु के 20 बच्चों में से 15 बच्चे केंद्र पहुंचे। सबसे खास बात यह रही कि इन बच्चों ने शर्मिष्ठा के हाथों से बना खाना भी खाया। छोटे बच्चों के अभिभावकों ने भी सरकार द्वारा दिया जाने वाला राशन घर ले जाने पर सहमति जताई।
शर्मिष्ठा का हौसला: 'ये बच्चे देश का भविष्य हैं'
बहिष्कार का दंश झेलने वाली शर्मिष्ठा सेठी ने बच्चों की वापसी पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि माता-पिता अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र लाए हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे उन्हें रोज भेजेंगे। मैं चाहती हूं कि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाएं और अच्छी पढ़ाई करें, क्योंकि वे ही इस गांव और देश का भविष्य हैं।"
प्रशासन की मेहनत लाई रंग
इस बदलाव के पीछे जिला प्रशासन की कड़ी मेहनत रही। शनिवार को अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक और जागरूकता अभियान के बाद ग्रामीणों का दिल पसीजा। सोमवार को स्थानीय बीजद विधायक ध्रुव साहू और वरिष्ठ अधिकारी खुद गांव पहुंचे और बच्चों के साथ केंद्र तक गए।
केंद्रपाड़ा की बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) दीपाली मिश्रा ने कहा, "यह समाज में एक सकारात्मक संदेश देगा। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों, जैसे आंगनवाड़ी केंद्र के लिए एक स्थायी जगह, को पूरा करने का आश्वासन दिया है।"
नुआगांव के निवासी गोवर्धन प्रधान ने बताया कि शनिवार की बैठक के बाद ग्रामीण मान गए हैं और अब भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।
सांसद ने साथ बैठकर किया भोजन
इस मामले को सुलझाने में जनप्र प्रतिनिधियों ने भी अहम भूमिका निभाई। केंद्रपाड़ा के सांसद बैजयंत पांडा ने रविवार को केंद्र का दौरा किया था और स्थानीय नेताओं व समुदाय के लोगों के साथ भोजन साझा किया था।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "नुआगांव आंगनवाड़ी में आज बच्चों को पौष्टिक भोजन करते देख बहुत खुशी हुई। कल ही मैंने यहां की समीक्षा की थी और स्थानीय नेताओं व ग्रामीणों के साथ शानदार दोपहर का भोजन किया था। बच्चों की बेहतरीन शुरुआत के लिए समुदाय को एक साथ आते देखना सुखद है।"
शिक्षक बनने का सपना देख रही हैं शर्मिष्ठा
शर्मिष्ठा अपने समुदाय की पहली ग्रेजुएट हैं। वह अपने गांव से इस नौकरी के लिए आवेदन करने वाली एकमात्र उम्मीदवार थीं। हालांकि, वह इस पद के लिए निर्धारित योग्यता से कहीं अधिक पढ़ी-लिखी हैं और उन्हें मानदेय के रूप में केवल 5,000 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। फिर भी, वह इस पैसे से अपने परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती हैं। शर्मिष्ठा का सपना एक शिक्षक बनने का है और इसके लिए वह 'अर्ली चाइल्डहुड केयर एजुकेशन' में डिस्टेंस लर्निंग के जरिए डिप्लोमा भी कर रही हैं।
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