ओडिशा: पुलिस हिरासत में युवक की दर्दनाक मौत, तीन पुलिसकर्मी निलंबित और IPS का तबादला

ओडिशा के गंजम जिले में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत के बाद प्रशासन सख्त। मामले में तीन पुलिसकर्मी निलंबित, एक आईपीएस अधिकारी का तबादला और मानवाधिकार संरक्षण सेल (HRPC) को सौंपी गई पूरी जांच।
Odisha custodial death.
ओडिशा के गंजम में पुलिस कस्टडी में युवक की दर्दनाक मौत से हड़कंप। मामले में 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड और IPS का तबादला।(Ai Image)
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नई दिल्ली: ओडिशा के गंजम जिले में पुलिस हिरासत के दौरान कथित प्रताड़ना से एक व्यक्ति की मौत का दर्दनाक मामला सामने आया है। इस गंभीर घटना ने पुलिस प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार, 1 जून को तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि एक आईपीएस अधिकारी का तबादला किया गया है।

यह खौफनाक घटना कबिसूर्यनगर पुलिस स्टेशन की है। मृतक की पत्नी मामाजिनी प्रधान ने पुलिस की कार्यशैली पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, 25 मई 2026 को पुलिस ने उनके पति सुशांत साहू और एक अन्य व्यक्ति ईश्वर साहू को उनके घर से उठा लिया था। बताया जा रहा है कि इन दोनों की गिरफ्तारी पत्थर ब्लास्टिंग से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई थी।

मामाजिनी प्रधान ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उनके पति और दूसरे व्यक्ति को किसी अदालत में पेश नहीं किया गया। इसके बजाय, थाने के भीतर उन्हें अमानवीय और शारीरिक यातनाएं दी गईं। रविवार, 31 मई 2026 को पुलिस ने सुशांत के पिता और भाई को थाने बुलाया और उसे अपने साथ ले जाने का फरमान सुनाया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बात न मानने पर उन्हें भी झूठे मुकदमों में फंसाने की सीधी धमकी दी थी।

पीड़ित पत्नी के अनुसार, पुलिस ने डरा-धमकाकर एक सादे कागज पर उनके हस्ताक्षर भी करवा लिए। गंभीर रूप से घायल सुशांत को परिवार ने सबसे पहले अस्का सब-डिविजनल अस्पताल में भर्ती कराया। जब वहां उसकी हालत लगातार बिगड़ने लगी, तो उसे तुरंत बेरहामपुर के एमकेसीजी (MKCG) अस्पताल ले जाया गया। वहां 31 मई और 1 जून की दरमियानी रात डॉक्टरों ने जांच के बाद सुशांत को मृत घोषित कर दिया।

इस घटना से आक्रोशित मामाजिनी ने मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने प्रशासन से कहा है कि 25 मई से 31 मई के बीच के पुलिस स्टेशन के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं। साथ ही, उन्होंने नवनियुक्त आईपीएस अधिकारी नितेश कुमार मिश्रा को भी इस पूरे प्रकरण की जांच के दायरे में लाने की सख्त मांग की है।

हिरासत में मौत के इन आरोपों के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में एक प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई। इसके तुरंत बाद, दक्षिणी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने कड़ा कदम उठाते हुए आईपीएस नितेश कुमार मिश्रा को पुलिस जिला मुख्यालय स्थानांतरित कर दिया। वहीं, सब-इंस्पेक्टर समीर कुमार राउत, सहायक सब-इंस्पेक्टर बैकुंठ जेना और कांस्टेबल सुमन कुमार साहू को निलंबित कर दिया गया है।

कार्रवाई का दायरा यहीं तक सीमित नहीं रहा। कबिसूर्यनगर पुलिस स्टेशन और बालीछाई पुलिस आउटपोस्ट के सभी कर्मचारियों का भी उनकी वर्तमान पोस्टिंग से अन्य जगहों पर तबादला कर दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) वाई. बी. खुरानिया ने आदेश दिया है कि पुलिस कस्टडी में हुई इस कथित प्रताड़ना की विस्तृत जांच ओडिशा पुलिस के मानवाधिकार संरक्षण सेल (HRPC) द्वारा की जाए।

ओडिशा पुलिस को इन दिनों हिरासत में प्रताड़ना के मामलों को लेकर चौतरफा आलोचना झेलनी पड़ रही है। हाल ही में, बारंगा पुलिस स्टेशन के कर्मियों की कथित बर्बरता के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने भारी हंगामा करते हुए व्यस्त बारंगा-त्रिशूलिया सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया था।

इस भारी विरोध के बाद बारंगा थाने के प्रभारी निरीक्षक (IIC) का भी तबादला करना पड़ा था। इसके अलावा कटक जिले से भी हाल ही में पुलिस प्रताड़ना का एक ऐसा ही मामला सामने आ चुका है।

इस बीच, मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने राज्य में हिरासत में होने वाली मौतों के बढ़ते ग्राफ पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संसद में दिए गए एक आधिकारिक जवाब का हवाला देते हुए पार्टी ने बताया कि अकेले 2025 से लेकर 15 मार्च 2026 के बीच ही हिरासत में मौत के नौ मामले सामने आ चुके हैं।

यह आंकड़ा पिछले चार वर्षों— 2021-22, 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में दर्ज की गई कस्टोडियल मौतों की कुल संख्या के बिल्कुल बराबर है, जो राज्य की कानून व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर पेश करता है।

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