
राजस्थान: पुलिस जांच के अनुसार उम्मीदवारों के बीच बांटे गए 410 सवालों में से 120 केमिस्ट्री के प्रश्न मुख्य परीक्षा के पेपर से हूबहू मिले हैं। हालांकि, मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
बीते 3 मई को आयोजित हुई राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी 2026) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्न पत्र लीक होने के गंभीर आरोपों के बाद परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अपना रुख साफ किया है।
एनटीए ने कहा है कि वह कथित अनियमितताओं को लेकर राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) द्वारा शुरू की गई कार्रवाई और उससे जुड़ी खबरों से पूरी तरह अवगत है।
यह पूरा मामला परीक्षा से पहले वायरल हुए एक कथित 'गेस पेपर' से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस कथित गेस पेपर में दिए गए सवाल मुख्य परीक्षा के प्रश्नों से काफी हद तक मेल खाते थे।
राजस्थान पुलिस एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) विशाल बंसल ने इस मामले में अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस सामग्री को फैलाने के पीछे किसी संगठित अपराध गिरोह का हाथ है।
पुलिस के मुताबिक, यह गेस पेपर फाइनल परीक्षा से करीब एक महीने पहले से ही उम्मीदवारों के बीच घूम रहा था। इसे लोगों के बीच आपसी बातचीत और फोटोकॉपी के जरिए बड़े पैमाने पर बांटा गया था।
एडीजी बंसल ने बताया कि जांच दल को छात्रों के व्हाट्सएप चैट्स में भी इस गेस पेपर के डिजिटल रूप से फॉरवर्ड होने के पक्के सबूत मिले हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 150 पन्नों वाले इस पीडीएफ डॉक्यूमेंट में कुल 410 प्रश्न मौजूद थे। इनमें से 120 केमिस्ट्री के सवाल ठीक वही थे, जो असल प्रश्न पत्र में पूछे गए थे।
पुलिस का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सघन जांच जारी है, लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
एनटीए का आधिकारिक बयान
एनटीए ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वे ऐसी खबरों से छात्रों में होने वाली घबराहट और चिंता को बखूबी समझते हैं। एजेंसी ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे जांच एजेंसियों को अपना काम पूरा करने का समय दें।
टेस्टिंग एजेंसी ने यह भी साफ किया है कि सही समय आने पर शिक्षा मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श करके जो भी जरूरी कदम होंगे, वे उठाए जाएंगे।
एनटीए अधिकारियों ने बताया कि 3 मई को परीक्षा होने के चार दिन बाद, यानी 7 मई की देर शाम उन्हें इन कथित गड़बड़ियों और कदाचार के इनपुट्स मिले थे।
अधिकारियों के अनुसार, इन प्राथमिक जानकारियों को स्वतंत्र जांच और उचित कार्रवाई के लिए 8 मई की सुबह ही केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया था।
बयान में इस बात की पुष्टि की गई है कि एनटीए पूरी तरह से सहयोगी की भूमिका निभा रहा है। वे जांच के लिए आवश्यक परीक्षा से जुड़ा सभी डेटा और तकनीकी सहायता जांच एजेंसियों को मुहैया करा रहे हैं।
एजेंसी ने दावा किया है कि परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कड़े घेरे में कराई गई थी। प्रश्न पत्रों को ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग लगी थी और उन पर ट्रैक किए जा सकने वाले खास वॉटरमार्क भी थे।
परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए बताया गया कि वहां एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों से सेंट्रल कंट्रोल रूम के जरिए निगरानी की जा रही थी। इसके अलावा हर छात्र की बायोमेट्रिक जांच की गई और केंद्रों पर 5जी जैमर भी लगाए गए थे।
एनटीए का कहना है कि परीक्षा के दिन सभी केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के योजना के अनुसार ही संपन्न हुई थी।
बयान में आगे कहा गया है कि मामला फिलहाल जांच के अधीन है और जांच एजेंसियां जल्द ही सारे तथ्य आधिकारिक रूप से सामने लाएंगी।
एनटीए ने जोर देकर कहा कि वह जांच से पहले न तो कोई निष्कर्ष निकालेगा और न ही इसके संभावित नतीजों पर कोई टिप्पणी करेगा। एजेंसियों की जांच में जो भी बातें सामने आएंगी, उन पर तय प्रक्रिया के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ विचार कर उचित खुलासा किया जाएगा।
लीक नेटवर्क की गहरी जांच
इस बीच जांचकर्ताओं ने बताया है कि यह 'क्वेश्चन बैंक' कथित तौर पर केरल में पढ़ रहे चूरू के एक मेडिकल छात्र से शुरू हुआ था।
इसके बाद 1 मई को यह सीकर के एक सहयोगी तक पहुंचा। फिर एक पेइंग गेस्ट (पीजी) संचालक के जरिए इसे 30 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलकर परीक्षार्थियों को बेचा गया।
राजस्थान एसओजी इस गिरोह की तह तक जाने के लिए पिछले चार दिनों में देहरादून, सीकर और झुंझुनू से जुड़े तेरह संदिग्धों से लंबी पूछताछ कर चुकी है।
राजनीतिक घमासान तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर सरकार और सिस्टम पर कड़ा प्रहार किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा शुरू होने से 42 घंटे पहले ही सवाल व्हाट्सएप पर सर्कुलेट हो गए थे, जिससे 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
गांधी ने दावा किया कि इस परीक्षा के साथ गंभीर समझौता किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैसेजिंग ऐप पर सवालों की खुलेआम बिक्री के कारण नीट अब सिर्फ एक नीलामी का मंच बनकर रह गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने पिछले 10 सालों में 89 पेपर लीक और 48 बार दोबारा परीक्षा (री-एग्जाम) होने के दावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार के बार-बार दिए गए आश्वासनों के बाद अंत में सिर्फ खामोशी ही देखने को मिलती है और वे इस अन्याय के खिलाफ छात्रों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
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