नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता से ईंधन के उपयोग में कटौती, सोने की खरीदारी कम करने और विदेश यात्राओं से बचने के सुझावों पर विपक्षी दलों ने सोमवार, 11 मई 2026 को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इन अपीलों को सरकार की नाकामी का सीधा प्रमाण करार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात साझा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी ने कल जनता से बड़े बलिदान मांगे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि सोना न खरीदना, विदेश न जाना, पेट्रोल का कम उपयोग करना और वर्क फ्रॉम होम करना कोई उपदेश नहीं बल्कि विफलताओं का दस्तावेज है।
विपक्षी नेता के अनुसार पिछले 12 वर्षों में देश को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया गया है, जहां अब सरकार जनता को यह बता रही है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व को देश चलाने में अक्षम बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री की चुनावी सक्रियता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब देश इन संकटों की ओर बढ़ रहा था, तब वह रोड शो और रैलियों में क्यों व्यस्त थे।
उन्होंने याद दिलाया कि 28 फरवरी को जब पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ था, तभी कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था की बदहाली, रुपये की गिरावट और ईंधन की कमी जैसे मुद्दों पर सरकार को आगाह किया था। खड़गे ने कहा कि सरकार ने किसानों के उर्वरकों और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पूरी तरह नजरअंदाज किया।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रधानमंत्री की इन अपीलों को हार मानने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव संपन्न होते ही सरकार को अचानक देश में संकट नजर आने लगा है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि असल में देश के लिए भाजपा ही सबसे बड़ा संकट बन चुकी है।
सोने की खरीदारी न करने की अपील पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह सलाह भ्रष्ट नेताओं को दी जानी चाहिए, क्योंकि आम जनता के पास तो वैसे भी सोना खरीदने की हैसियत नहीं बची है।
सीपीआई के महासचिव डी. राजा ने सरकार के सुझावों की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब लोगों के पास खाने के पैसे नहीं हैं, तब सोने की बात करना बेमानी है। उन्होंने 'वर्क फ्रॉम होम' के सुझाव पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या सड़क साफ करने वाले या निर्माण कार्य में लगे श्रमिक घर से काम कर सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव के समय सरकार के दावों की याद दिलाई। उन्होंने पूछा कि विधानसभा चुनावों के दौरान सरकार ने आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक को लेकर चिंता क्यों नहीं जाहिर की थी। सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता को केवल वोट देने वाली मशीन समझ लिया है और चुनाव खत्म होते ही उन पर पाबंदियां थोपी जा रही हैं।
कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने इस स्थिति को आने वाले बड़े आर्थिक झटकों का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक हालात सरकारी आंकड़ों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हैं। रमेश ने आशंका जताई कि ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि जैसे कठोर फैसले जल्द ही लिए जा सकते हैं और वर्तमान में जनता के बीच केवल इसके लिए मानसिक जमीन तैयार की जा रही है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें