यूपी कैबिनेट विस्तार पर मायावती का तंज: इसे सिर्फ 'जातीय संतुलन' नहीं, बल्कि बेहतर सुशासन में बदलना चाहिए

बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी कैबिनेट विस्तार को बताया 'राजनीतिक जुगाड़', भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा- प्रदेश में ब्राह्मण खुद को उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती
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उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में हुए हालिया कैबिनेट विस्तार को लेकर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के राजनीतिक कदम केवल जातीय समीकरणों को साधने तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इसके बजाय इनका असर बेहतर सुशासन, मजबूत कानून-व्यवस्था और समाज के सभी वर्गों की सुरक्षा के रूप में जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के भीतर मंत्रिमंडल के विस्तार जैसे आंतरिक फैसलों पर टिप्पणी करना वैसे तो उचित नहीं है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका व्यापक और सकारात्मक प्रभाव आम जनता, किसानों, युवाओं, मजदूरों और गरीबों के जीवन में सुधार के रूप में नजर आना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो लोग इसे महज एक 'राजनीतिक जुगाड़' और सरकारी संसाधनों पर पड़ा हुआ अतिरिक्त बोझ ही मानेंगे।

मायावती की यह तीखी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने विस्तारित मंत्रिमंडल के जरिए जातीय प्रतिनिधित्व को फिर से संतुलित करने का प्रयास कर रही है।

अपनी पोस्ट में बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट किया कि सरकारों और उनके मंत्रियों की पहली संवैधानिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि समाज का हर वर्ग सुरक्षित महसूस करे। विशेषकर कमजोर और हाशिए पर रहने वाले समूहों को यह विश्वास होना चाहिए कि उनके जीवन, संपत्ति और धर्म की पूरी सुरक्षा हो रही है और उन्हें न्याय मिल रहा है।

प्रदेश की कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए मायावती ने राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखने वाले भाजपा युवा मोर्चा के एक नेता पर हुए हालिया जानलेवा हमले का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस गंभीर घटना के बाद पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक बार फिर से बहस तेज हो गई है।

बसपा अध्यक्ष ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय मौजूदा समय में न केवल 'उपेक्षित' बल्कि 'काफी असुरक्षित' भी महसूस कर रहा है, जो कि एक बेहद चिंताजनक स्थिति है।

मौजूदा हालात की तुलना अपनी पिछली बसपा सरकारों के कार्यकाल से करते हुए उन्होंने अपनी पुरानी नीतियों की याद दिलाई। मायावती ने दावा किया कि उनकी पार्टी के 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के सिद्धांत के तहत उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था हमेशा मजबूत रही। उनका कहना था कि बसपा शासनकाल के दौरान ब्राह्मणों सहित समाज के हर वर्ग और समुदाय को बिना किसी भेदभाव के पूर्ण न्याय और सुरक्षा प्रदान की गई थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में हुए इस ताज़ा कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने मुख्य रूप से ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और दलित चेहरों को तरजीह दी है। इसके अलावा, जातीय समीकरणों को साधने की इसी कवायद के तहत समाजवादी पार्टी (सपा) के बागी नेता और ब्राह्मण विधायक मनोज कुमार पांडेय को भी इस नए मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।

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