
दमोह- मध्य प्रदेश के दमोह जिले के फुटेरा तालाब पर 20 अक्टूबर की शाम दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी के साथ हुई अभद्रता और जातिवादी अपमान की घटना ने पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है। सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल रहा है। बहुजन समुदाय इस घटना को सिर्फ एक अधिकारी के साथ बदसलूकी नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही जातिवादी मानसिकता का आईना बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। वहीं, सीएमओ लोधी ने वीडियो जारी कर कहा है कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए उन्होंने मामला सुलझा लिया है।
20 अक्टूबर को फुटेरा तालाब पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेडिंग को लेकर विवाद हुआ। नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी बैरिकेडिंग हटाने से रोक रहे थे। इस दौरान दुर्गोत्सव समिति के सदस्यों और पूर्व भाजपा नेता सतीश तिवारी के साथ झड़प हो गई। समिति के सदस्यों ने सीएमओ पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया वहीं लोधी ने कहा कि उनके साथ धक्का-मुक्की हुई, उन्हें तालाब में धकेलने की कोशिश की गई और जातिवादी टिप्पणियां की गईं। एक वायरल वीडियो में दिख रहा है कि लोधी को समुदाय के लोग घेरे खड़े हैं और माफ़ी मांगने के लिए दबाव बना रहे हैं , एक महिला कहती सुनाई दे रही हैं कि – “हम ब्राह्मण हैं, तुम छोटी जाति हो। अगर ब्राह्मण के सामने हाथ जोड़ लोगे, तो तुम्हारा क्या चला जाएगा?”
सीएमओ की ओर से भी सदस्यों पर दबाव बनाने और धमकाने के आरोप लगाए गए। इस दौरान सीएमओ के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। सीएमओ ने आरोप लगाया कि उन्हें जाति के आधार पर नीचा दिखाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया गया। विसर्जन करीब डेढ़ घंटे तक प्रभावित रहा। पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रित हुई।
अगले दिन नगर पालिका कर्मचारियों के संघ ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर सतीश तिवारी समेत आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जातिगत अपमान, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई। कर्मचारियों ने 24 घंटे के अंदर कार्रवाई न होने पर हड़ताल की चेतावनी भी दी। एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि कोतवाली थाने को जांच के निर्देश दिए गए हैं और सीसीटीवी फुटेज की जांच चल रही है।
22 अक्टूबर को मामले में नया मोड़ आया। एक तरफ FIR दर्ज हो चुकी है, दूसरी तरफ कलेक्टर कार्यालय की ओर से समझौते वाला बयान सामने आया। सीएमओ लोधी ने खुद वीडियो जारी कर कहा कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए उन्होंने मामला सुलझा लिया है।
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इस घटना पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ एक अधिकारी के साथ अभद्रता का मामला नहीं, बल्कि जातिवादी सोच का प्रमाण है। उन्होंने लिखा, “यही तो जातिवाद है कि इंसान अपनी मेहनत और काबिलियत से ऊँचे पद पर पहुँच जाए, लेकिन जातिवादी सोच उसे आज भी उसकी जाति के आधार पर नीचा दिखाने और अपमानित करने से बाज न आए!।” आजाद ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
लोधी समाज के नेता और बहुजन संगठनों ने भी आक्रोश जताया है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग पूछ रहे हैं कि क्या ऊंचे पद पर बैठे अधिकारी भी जाति के आधार पर अपमानित किए जा सकते हैं?
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