नस्लीय भेदभाव पर गृह मंत्रालय सख्त: नोएडा-गाजियाबाद में पूर्वोत्तर के लोगों के लिए तैनात होंगे विशेष अफसर

नस्लीय भेदभाव और अत्याचार को रोकने के लिए गृह मंत्रालय का बड़ा कदम; नोएडा और गाजियाबाद समेत पूरे NCR में तैनात होंगे विशेष अधिकारी।
Northeast people discrimination.
दिल्ली-गुरुग्राम के बाद अब यूपी NCR की बारी, पूर्वोत्तर के लोगों की शिकायतों के लिए बैठेंगे नोडल अधिकारी(Ai Image)
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नई दिल्ली: पूर्वोत्तर के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव और अन्य समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने हाल ही में हुई एक अहम बैठक में सिफारिश की है कि नोएडा, गाजियाबाद और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अन्य शहरों में पूर्वोत्तर समुदाय के लोगों के लिए विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि एनसीआर में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की एक बड़ी आबादी रहती है और दिल्ली तथा गुरुग्राम में पहले से ही ऐसे नोडल अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

यह महत्वपूर्ण फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक निगरानी समिति की अगुवाई में हुई बैठक में लिया गया है। यह समिति विशेष रूप से पूर्वोत्तर के लोगों के कल्याण के लिए काम करती है। समिति के एक सदस्य जे माइवियो ने इस बात की पुष्टि की है कि यह सिफारिश की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि समिति जल्द ही देश के अन्य राज्यों और उन महानगरों में भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की सिफारिश करेगी, जहां पूर्वोत्तर के लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं।

नस्लीय भेदभाव, हिंसा और अत्याचार जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए यह समिति नियमित तौर पर काम कर रही है। आमतौर पर हर महीने इस समिति की बैठक होती है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य शिकायतों के निपटारे की प्रगति जांचना और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की निगरानी करना है।

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को भी निर्देश दिया है कि वे एनसीआर के अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ चर्चा करें। इसका लक्ष्य पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के साथ-साथ दार्जिलिंग के गोरखाओं और लद्दाख के लोगों के कल्याण के लिए बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है।

इस निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस ने नोएडा और गाजियाबाद पुलिस के साथ समन्वय भी किया है। एक अधिकारी के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में इस क्षेत्र के करीब 15 लाख लोग रहते हैं। इनमें से ज्यादातर आबादी दिल्ली और गुरुग्राम में है, जबकि एक बड़ी संख्या गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी रहती है।

राजधानी दिल्ली में इस तरह के मामलों से निपटने के लिए पहले से ही संयुक्त आयुक्त (जॉइंट कमिश्नर) स्तर के एक नोडल अधिकारी तैनात हैं। वह नस्लीय भेदभाव और अन्य शिकायतों को सुलझाने के लिए दिल्ली के सभी 15 पुलिस जिलों के साथ समन्वय करते हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस के पास पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक विशेष पुलिस इकाई (SPUNER) भी है। करीब 80 पुलिसकर्मियों वाली इस इकाई की निगरानी संयुक्त आयुक्त और विशेष आयुक्त स्तर के अधिकारी करते हैं और यह पूर्वोत्तर के मामलों में स्थानीय पुलिस की मदद करती है।

इस साल फरवरी और मार्च में राजधानी के अंदर नस्लीय हमलों के दो कथित मामले सामने आए थे, जिनमें अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के छात्र तथा एक वकील शिकार हुए थे। इन घटनाओं के बीच सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो गुरुग्राम पुलिस के पास पूर्वोत्तर के लोगों के लिए एक विशेष हेल्पलाइन मौजूद है, जिसकी कमान पुलिस उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) स्तर के अधिकारी के पास है। हालांकि, नोएडा और गाजियाबाद पुलिस के पास फिलहाल पूर्वोत्तर समुदाय की मदद के लिए न तो कोई समर्पित हेल्पलाइन है और न ही कोई नोडल अधिकारी मौजूद है।

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