मऊ: रेप पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव, तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज

वायरल वीडियो ने खोली पोल: रेप केस वापस लेने के लिए पीड़िता को ऑफर किए पैसे, मऊ पुलिस ने 3 नेताओं के खिलाफ शुरू की जांच
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक 25 वर्षीय युवती, जिसने हाल ही में अपने सहकर्मी पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर उसे जेल भिजवाया था, अब एक नई मुसीबत का सामना कर रही है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि स्थानीय भाजपा नेता उसे एफआईआर (FIR) वापस लेने के लिए धमका रहे हैं।

हालाँकि, भाजपा की मऊ जिला इकाई ने धमकी देने के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन स्थानीय भाजपा नेताओं के खिलाफ आपराधिक धमकी (criminal intimidation) का केस दर्ज कर लिया है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, पीड़िता का दर्द आया सामने

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीड़िता कथित तौर पर यह कहती हुई सुनाई दे रही है कि भाजपा के कुछ नेता उसके घर पहुंचे थे। युवती का इल्जाम है कि इन नेताओं ने मामले को "रफा-दफा" करने यानी सेटलमेंट के लिए उसे पैसों का लालच दिया। वीडियो में पीड़िता ने साफ तौर पर हिमांशु राय, संतोष सिंह और कन्हैया तिवारी का नाम लिया है और उन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

आरोपी नेताओं की पहचान भी सामने आ गई है. जिसमें संतोष सिंह भाजपा के मऊ जिला उपाध्यक्ष, हिमांशु राय पार्टी के मंडल अध्यक्ष, कन्हैया तिवारी शक्ति केंद्र के जिला संयोजक शामिल हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे प्रकरण पर मऊ के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP), अनूप कुमार ने कहा, "मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जो भी सबूत सामने आएंगे, उनके आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच के हिस्से के रूप में वायरल वीडियो की भी बारीकी से जांच की जाएगी।

भाजपा जिलाध्यक्ष की सफाई- 'पंचायत में जाना अपराध नहीं'

जब इस मामले में भाजपा के मऊ जिला अध्यक्ष, रामाश्रय मौर्य से संपर्क किया गया, तो उन्होंने धमकी देने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि तीनों नेता वहां धमकी देने या दबाव बनाने नहीं गए थे, बल्कि वे उस क्षेत्र में आयोजित एक पंचायत में हिस्सा लेने गए थे, जिसका उद्देश्य युवती और आरोपी युवक के बीच विवाद को सुलझाना था।

मौर्य ने कहा, "पंचायत में भाग लेना कोई गुनाह नहीं है, जहाँ लोग आमतौर पर बैठकर मामलों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश करते हैं। हमारे तीनों नेताओं का न तो पीड़िता से कोई निजी रिश्ता है और न ही आरोपी से।" उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके नेताओं के कार्यों में कुछ भी अनुचित नहीं था और यह पंचायत पीड़िता के घर पर नहीं, बल्कि किसी अन्य स्थान पर हुई थी। वायरल वीडियो को लेकर उनका कहना था कि उसमें कुछ भी "गंभीर या आपत्तिजनक" नहीं है।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब युवती ने 23 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि 24 वर्षीय अंकित सिंह, जो उसी के साथ एक सरकारी विभाग में संविदा (contractual basis) पर काम करता था, ने शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया। पुलिस के अनुसार, दोनों 2023 से यानी पिछले लगभग दो साल से साथ काम कर रहे थे।

शिकायत मिलने के अगले ही दिन, 24 जनवरी को पुलिस ने अंकित सिंह को रेप के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

इसके बाद, 26 जनवरी को पीड़िता ने एक और शिकायत दी। इसमें उसने आरोप लगाया कि तीन लोग उसके घर आए और उस पर समझौता करने और केस वापस लेने का दबाव बनाया। पीड़िता का कहना है कि बात न मानने पर उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।

फिलहाल, पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि तीनों भाजपा नेता युवती के आवास पर गए थे। अब पुलिस मामले की तह तक जाने में जुटी है।

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