मनोज बाजपेयी की फिल्म पर क्यों मचा हड़कंप? 'विशेष' समुदाय को अपमानित करने के आरोप में डायरेक्टर पर FIR

हजरतगंज पुलिस ने BNS की गंभीर धाराओं में दर्ज किया केस, फिल्म के टाइटल और टीजर पर विशेष समुदाय को अपमानित करने का है आरोप।
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लखनऊ: बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़ों और विवादों में घिर गई है। फिल्म के हाल ही में जारी हुए टीजर और उसके शीर्षक को लेकर उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर एक विशेष वर्ग में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है और हजरतगंज कोतवाली में फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस ने यह कार्रवाई सामाजिक विद्वेष फैलाने, धार्मिक और जातीय भावनाओं को आहत करने तथा सार्वजनिक शांति भंग करने के प्रयास के आरोपों के तहत की है।

पुलिस ने स्वतः लिया संज्ञान

इस मामले में हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फिल्म की प्रचार सामग्री का खुद संज्ञान लिया। पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया फिल्म का शीर्षक और उससे जुड़ा कंटेंट बेहद आपत्तिजनक पाया गया। एफआईआर में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि फिल्म का नाम जानबूझकर इस तरह रखा गया प्रतीत होता है, जिसका उद्देश्य एक विशेष समुदाय या जाति को नीचा दिखाना और अपमानित करना है।

ब्राह्मण समाज में गहरा रोष

फिल्म के टाइटल और विषयवस्तु को लेकर ब्राह्मण समाज और कई अन्य सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इन संगठनों में फिल्म को लेकर काफी गुस्सा है और उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे उग्र प्रदर्शन करने पर बाध्य होंगे। इस तरह के विरोध के स्वरों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि इससे शहर की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति पर बुरा असर पड़ने की आशंका थी।

संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज

डीसीपी सेंट्रल जोन, विक्रांत वीर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने स्थिति की नजाकत को भांपते हुए त्वरित कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्देशक और उनकी टीम द्वारा इस तरह के कंटेंट का प्रचार-प्रसार करना समाज में वैमनस्यता और दुश्मनी फैलाने की मंशा को दर्शाता है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

डीसीपी ने पुष्टि की कि हजरतगंज पुलिस ने निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच असद्भाव और शत्रुता को बढ़ावा देना), 299 (किसी वर्ग की भावनाओं को भड़काने के लिए जानबूझकर किया गया कृत्य), 352 (शांति भंग करने के लिए उकसाना) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत मामला पंजीकृत किया है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान मिलने वाले सबूतों और प्रसारित सामग्री के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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