
भोपाल। जब जिम्मेदारियां टूट जाती हैं और मजबूरियां हावी हो जाती हैं, तब सबसे पहले बचपन कुचला जाता है। गरीबी, पारिवारिक विघटन और सामाजिक दबाव, इन तीनों के संगम ने एक बार फिर एक नाबालिग के भविष्य को मंडप तक ला खड़ा किया था। लेकिन ऐन वक्त पर प्रशासन और लाड़ो टीम की सतर्कता ने एक और बाल विवाह को इतिहास बनने से रोक दिया।
मध्यप्रदेश के सतना जिले के नागौद क्षेत्र में सामने आया यह मामला बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की भयावह तस्वीर पेश करता है। यहां 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा का विवाह 36 वर्षीय युवक से कराया जा रहा था। शादी की रस्में शुरू हो चुकी थीं, मंडप सज चुका था और परिजन तैयारियों में जुटे थे। सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन यह ‘सामान्यता’ कानून और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ थी।
सूचना पर पहुँचीं थी टीम
इसी बीच चाइल्ड लाइन को मिली एक गोपनीय सूचना ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल संबंधित एसडीएम को अवगत कराया। बिना समय गंवाए एसडीएम के निर्देश पर लाड़ो टीम, परियोजना अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौके के लिए रवाना हुआ।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
मौके पर पहुंची टीम ने सबसे पहले परिवार और दूल्हे को समझाइश देने का प्रयास किया। उन्हें बताया गया कि यह विवाह कानूनन अपराध है और इससे नाबालिग के जीवन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि शुरुआती बातचीत के दौरान दूल्हा विवाह रोकने को तैयार नहीं हुआ। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने पुलिस को बुलाया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की स्पष्ट जानकारी दी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। दूल्हे और परिजनों को बताया गया कि बाल विवाह कराने, सहयोग करने और प्रोत्साहित करने पर कठोर दंड का प्रावधान है। आखिरकार कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बाद विवाह रोक दिया गया।
नाबालिग कक्षा 10वीं की छात्रा
जांच में सामने आया कि नाबालिग लड़की कक्षा 10वीं की छात्रा है और नागौद क्षेत्र के सुरदहा गांव की निवासी है। वहीं 36 वर्षीय दूल्हा रहिकवारा गांव का बताया गया है। उम्र का यह बड़ा अंतर और नाबालिग की शैक्षणिक स्थिति इस मामले की गंभीरता को और उजागर करता है।
टूटा हुआ परिवार और मजबूर हालात
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिग के पिता वर्तमान में जेल में बंद हैं, जबकि उसकी मां घर छोड़कर चली गई है। परिवार में दो छोटी बहनें और एक भाई हैं। इन सभी बच्चों की देखरेख 75 वर्षीय वृद्ध दादा कर रहे थे। बढ़ती उम्र, कमजोर आर्थिक स्थिति और सामाजिक दबाव के कारण दादा ने स्वयं को जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ बताया, जिसके चलते परिवार ने जल्दबाजी में विवाह का फैसला लिया।
तीन बच्चों को संरक्षण, जबलपुर भेजने की तैयारी
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कदम उठाए। तीनों छोटे बच्चों को संरक्षण में लेकर वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार बच्चों को जल्द ही जबलपुर स्थानांतरित किया जाएगा, जहां उनकी शिक्षा, सुरक्षा और देखभाल की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
नाबालिग के भविष्य की नई राह
वहीं नाबालिग लड़की को उसकी परीक्षा समाप्त होने के बाद दादी के पास शहडोल भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि वह सुरक्षित माहौल में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रख सके। प्रशासन का कहना है कि बच्ची के शैक्षणिक और मानसिक हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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