इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर जारी: 33वीं मरीज की मौत, नर्मदा चैंबर में निजी ड्रेनेज लाइन कैसे जुड़ी?

मामला उजागर होने के बाद विवाद भी सामने आया है। पाराशर नगर रहवासी संघ ने आरोप लगाया कि जिन मकानों ने ड्रेनेज लाइन नर्मदा चैंबर से जोड़ी थी, वे कॉलोनी के मूल ले-आउट में शामिल ही नहीं हैं और अवैध निर्माण हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का कहर जारी: 33वीं मरीज की मौत, नर्मदा चैंबर में निजी ड्रेनेज लाइन कैसे जुड़ी?
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भोपाल। मध्यप्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को एक और दुखद घटना सामने आई, जब हलकूप्रसाद यादव ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वे पिछले कई दिनों से गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थे और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। इससे पहले इसी बीमारी की चपेट में आकर उनकी पत्नी की भी मौत हो चुकी है। एक ही परिवार में दो-दो मौतों ने पूरे इलाके को गहरे शोक और भय के माहौल में धकेल दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही मौतों के बावजूद हालात को लेकर भरोसा अब भी बहाल नहीं हो पाया है।

भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद उल्टी-दस्त के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। शुरुआती लक्षणों के बाद मरीजों की हालत अचानक बिगड़ रही है और धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों पर इसका असर दिखने लगता है। बीते दिनों हुई मौतों में बुजुर्गों की संख्या अधिक सामने आई है, जिससे क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों में खासा डर व्याप्त है। लोग आशंकित हैं कि यदि समय रहते व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

नर्मद चैंबर में ड्रेनेज लाइन कैसे जुड़ी?

नर्मदा चैंबर में निजी ड्रेनेज लाइन जोड़ने का खुलासा

दूषित पानी की शिकायतों के बाद नगर निगम की टीम ने वार्ड 80 में जांच शुरू की। रहवासियों का कहना था कि नलों से शुरुआती 10-15 मिनट तक नर्मदा जल के बजाय बदबूदार, दूषित पानी आ रहा था। शिकायत मिलने पर निगम की टीम नर्मदा जल वितरण के वाल्व तक पहुंची और जब वहां खुदाई कराई गई तो अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में सामने आया कि कुछ मकानों ने नर्मदा के चैंबर में ही अपनी निजी ड्रेनेज लाइन जोड़ रखी थी। जैसे ही पानी के लिए वाल्व खोला जाता, नाले का पानी पीने के पानी में मिलकर सीधे घरों तक पहुंच जाता था।

नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ड्रेनेज लाइन को अलग कराया। पार्षद प्रशांत बड़वे ने बताया कि पाराशर नगर के रहवासियों की शिकायत पर जब 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास बने नर्मदा वाल्व चैंबर की खुदाई की गई तो बदबूदार पानी निकलता मिला। जांच में यह भी सामने आया कि पास बने चार मकानों ने अवैध रूप से अपनी ड्रेनेज लाइन इस चैंबर में जोड़ दी थी, जिससे पूरे इलाके की जलापूर्ति दूषित हो रही थी।

शिकायतकर्ताओं को धमकाने का आरोप

मामला उजागर होने के बाद विवाद भी सामने आया है। पाराशर नगर रहवासी संघ ने आरोप लगाया कि जिन मकानों ने ड्रेनेज लाइन नर्मदा चैंबर से जोड़ी थी, वे कॉलोनी के मूल ले-आउट में शामिल ही नहीं हैं और अवैध निर्माण हैं। पार्षद के अनुसार, मामले के सामने आने के बाद संबंधित मकानों के लोग शिकायतकर्ताओं को धमकाने लगे और विवाद की स्थिति बन गई। फिलहाल निगम ने ड्रेनेज लाइन अलग कर दी है, जिसके बाद क्षेत्र में शुद्ध पानी की आपूर्ति शुरू होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, अब इन मकानों की वैधता की जांच भी की जाएगी।

ताप्ती परिसर में गंदगी और अधूरे कामों पर नाराजगी

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रंगवासा सिंदौड़ा स्थित ताप्ती परिसर में भी अव्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने गुरुवार को परिसर का निरीक्षण किया। यहां फेस-दो के ब्लाकों में बचे हुए निर्माण कार्य और विद्युतीकरण को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। परिसर में लगभग 1500 से अधिक परिवार निवास करते हैं। निरीक्षण के दौरान रहवासियों ने सामुदायिक भवन के निर्माण में देरी, साफ-सफाई और रखरखाव की खराब स्थिति को लेकर असंतोष जताया।

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