मणिपुर हिंसा: मौत के 4 महीने बाद होगा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे का अंतिम संस्कार, पत्नी की गिरती सेहत के चलते परिवार ने लिया फैसला

2023 की मणिपुर हिंसा में जानलेवा हमले का शिकार हुए बीजेपी विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे का 4 महीने बाद चुराचांदपुर में होगा अंतिम संस्कार, जानिए परिवार को क्यों लेना पड़ा यह फैसला।
मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में वाल ऑफ़ रिमेम्बर्स के सामने मौजूद कुकी समुदाय के लोग.
मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में वाल ऑफ़ रिमेम्बर्स के सामने मौजूद कुकी समुदाय के लोग.फोटो- राजन चौधरी, द मूकनायक
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नई दिल्ली: मणिपुर में साल 2023 की जातीय हिंसा के दौरान भीड़ के जानलेवा हमले का शिकार हुए विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे का शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका निधन करीब चार महीने पहले हुआ था। अब उनके पैतृक शहर चुराचांदपुर स्थित उनके घर पर उनके अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जाएंगी।

63 वर्षीय वाल्टे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और थानलॉन विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के विधायक रहे थे। जब मणिपुर में जातीय संघर्ष भड़का, तब वे राज्य के 10 कुकी-ज़ोमी विधायकों में से एक थे। इसके साथ ही वह तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के सलाहकार भी थे।

4 मई 2023 को राजधानी इंफाल में वाल्टे के ऊपर एक भयानक हमला हुआ था। इस हिंसक हमले में उनके शरीर में कई फ्रैक्चर हुए थे और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा था। वाल्टे कभी भी इन गंभीर चोटों से पूरी तरह उबर नहीं पाए। लंबी जद्दोजहद के बाद, इस साल 21 फरवरी को गुड़गांव के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

निधन के बाद जब उनका पार्थिव शरीर चुराचांदपुर लाया गया, तो उनके परिवार और ज़ोमी काउंसिल ने अंतिम संस्कार को फिलहाल टालने का फैसला किया। ज़ोमी काउंसिल आठ जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रमुख संस्था है। इसके बाद से उनका शव चुराचांदपुर मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में ही रखा हुआ था।

अंतिम संस्कार टालने के पीछे समुदाय की कुछ प्रमुख मांगें थीं। समुदाय चाहता था कि 2023 के इस हमले की जांच कोई केंद्रीय एजेंसी करे, क्योंकि इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। इसके अलावा, ज़ोमी काउंसिल ने भारत सरकार से समयबद्ध तरीके से बातचीत करने की मांग भी की थी, ताकि ज़ो समूहों के लिए इंफाल स्थित राज्य सरकार से अलग एक स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा सके।

हालांकि, अब इतने महीनों बाद उन्हें दफनाने का फैसला परिवार की इच्छा का सम्मान करते हुए लिया गया है। ज़ोमी काउंसिल के एक नेता ने बताया कि यह निर्णय पूरी तरह से व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से लिया गया है। दरअसल, वाल्टे की पत्नी की तबीयत काफी खराब चल रही है। शव को लंबे समय तक बिना दफनाए रखने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा था।

इस बीच, एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि चुराचांदपुर के स्थानीय प्रशासन को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के संभावित दौरे की सूचना दी गई है। उनके वाल्टे के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना है। जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से न तो उन्होंने और न ही उनके पूर्ववर्ती एन. बीरेन सिंह ने इस कुकी-ज़ोमी बहुल जिले का दौरा किया है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस दौरे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इस पर अंतिम फैसला शनिवार सुबह ही लिया जाएगा।

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