
बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक पत्थर खदान में गुरुवार (2 जुलाई) की सुबह एक बेहद खौफनाक हादसा हुआ। तवारेकेरे होबली के हुलुकेनाहल्ली गांव में एक विशाल चट्टान गिरने से सात मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। जान गंवाने वालों में छह प्रवासी मजदूर शामिल हैं।
यह दर्दनाक घटना सुबह करीब साढ़े सात बजे हुई। मजदूर पत्थर काटने और खदान के रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे। तभी अचानक पास की खदान में करीब 40 फीट की ऊंचाई से एक विशाल चट्टान टूटकर सीधे मजदूरों के ऊपर आ गिरी। इस भारी भरकम चट्टान की चपेट में कुछ वाहन भी आ गए, जिनमें कुचले हुए पत्थर लाद रही एक ट्रैक्टर ट्रॉली भी शामिल थी और देखते ही देखते कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए।
हादसे का शिकार हुए सात मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों में पांच मजदूर मध्य प्रदेश के थे, जबकि एक कर्नाटक और एक छत्तीसगढ़ का रहने वाला था। घटना की सूचना मिलते ही तवारेकेरे पुलिस और अग्निशमन व आपातकालीन सेवाओं की टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे से निकाले गए पांच घायल मजदूरों को इलाज के लिए तुरंत राजराजेश्वरी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
इस खौफनाक मंजर से बाल-बाल बचे तमिलनाडु के एक खदान मजदूर गोपी ने घटना की आंखों देखी बताई। उन्होंने दावा किया कि बसवेश्वर खदान में काम करने वाले कुछ लोग ऊपर चट्टान को खिसकाने की कोशिश कर रहे थे। अचानक वह विशाल पत्थर टूट गया और लुढ़कता हुआ नीचे एस.आर. उदयशंकर खदान में काम कर रहे मजदूरों पर जा गिरा। गोपी के मुताबिक अगर उन्हें पहले से चेतावनी दी गई होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
इस घोर लापरवाही को लेकर तवारेकेरे पुलिस ने सख्त कानूनी कार्रवाई की है। खदान मालिकों और सुपरवाइजरों सहित पांच लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (हत्या की श्रेणी में न आने वाले आपराधिक मानव वध) का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की पहचान डी. आनंदस्वामी, उदयशंकर, पांडु, तिरुपति और बसवेश्वर व एस.आर. उदयशंकर पत्थर खदानों के संचालन के लिए जिम्मेदार अन्य लोगों के रूप में हुई है। एफआईआर के अनुसार, सर्वे नंबर 29 में स्थित ये दोनों सटी हुई खदानें पिछले लगभग पांच वर्षों से चल रही थीं।
दर्ज की गई एफआईआर में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि खदान प्रबंधन ने पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना ही असुरक्षित माहौल में काम जारी रखा। पुलिस का कहना है कि प्रबंधन को चट्टान गिरने के खतरे का पहले से अंदाजा था। इसके बावजूद उन्होंने मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी और अनिवार्य कदम नहीं उठाए, जिसका नतीजा इतने बड़े जानमाल के नुकसान के रूप में सामने आया।
शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पूछताछ के लिए चार लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें खदान के दो मैनेजर, एक ड्राइवर और एक साइट इंचार्ज शामिल हैं। शुरुआती जांच में पुलिस को घटना के वक्त किसी भी तरह के विस्फोट (ब्लास्टिंग) के कोई सबूत नहीं मिले हैं।
जांचकर्ताओं का अनुमान है कि 40 फीट ऊपर स्थित यह भारी चट्टान अपनी अस्थिरता के कारण खिसक गई। हालांकि इस भूस्खलन के सटीक कारणों का अभी पता लगाया जा रहा है। मामले की गहराई से जांच जारी है और पुलिस ने खान और भूविज्ञान विभाग से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के जरिए यह तय किया जाएगा कि खदान संचालकों ने वैधानिक सुरक्षा नियमों और खनन कानूनों का पूरी तरह से पालन किया था या नहीं।
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