
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'निकाह हलाला' के नाम पर एक महिला के साथ हुए कथित गैंगरेप के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पति और अन्य सह-आरोपियों द्वारा एफआईआर रद्द करने की मांग वाली तीन याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसी व्यक्ति से दोबारा शादी करने के लिए उसे दो बार हलाला के बहाने सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाया गया, जिसमें से एक बार वह नाबालिग थी।
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ कर रही थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब बात आपराधिक कानून की आती है, तो कोई भी पर्सनल लॉ अपराध से बचाव का जरिया नहीं बन सकता। अदालत ने कहा कि वैवाहिक संबंधों की आड़ में यदि कोई जघन्य अपराध होता है, तो वहां पर्सनल लॉ की दलील बिल्कुल काम नहीं आएगी।
अदालत ने यह भी साफ किया कि फिलहाल उसके समक्ष 'हलाला' की संवैधानिकता को चुनौती नहीं दी गई है। हालांकि, पीठ ने सख्ती से कहा कि अगर हलाला की आड़ में किसी नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं, तो यह कृत्य निश्चित रूप से पॉक्सो (POCSO) एक्ट के दायरे में आएगा।
न्यायालय ने इस घटना को समाज की एक ऐसी तस्वीर बताया जो हमारे संवैधानिक मूल्यों से कोसों दूर है। जजों ने टिप्पणी की कि यह मामला समानता, निजता और व्यक्तिगत गरिमा की उन आकांक्षाओं के खिलाफ है, जिनकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत दी गई है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर आए तथ्य प्रथम दृष्टया अंतरात्मा को झकझोर देने वाले हैं।
इस मामले में 9 दिसंबर, 2025 को अमरोहा जिले में एफआईआर दर्ज की गई थी। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 (शारीरिक/मानसिक क्रूरता), 64 (दुष्कर्म) और 70(2) (गैंगरेप) के तहत दर्ज हुआ था। इसके अलावा मामले में मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 3/4 (तीन तलाक) और पॉक्सो एक्ट की सख्त धाराएं भी लगाई गई थीं।
प्राथमिकी और कोर्ट के आदेश में दर्ज पीड़िता के बयान के अनुसार, जब पहली बार यह खौफनाक घटना हुई, तब उसकी उम्र मात्र 16 साल थी। मामले में नामजद सह-आरोपियों में एक मौलवी, पति का भाई और उसका भतीजा शामिल हैं। इन सभी पर हलाला के बहाने महिला के साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया पहला हलाला वैधानिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध बनता है। वहीं, दूसरी बार हुई घटना सीधे तौर पर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) का मामला है। अदालत ने इन रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
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