मणिपुर: जातीय हिंसा में लापता 49 लोगों के परिजनों को मिलेगी 10-10 लाख रुपये की विशेष सहायता, समुदायों के बीच दूरियां बरकरार

मणिपुर जातीय हिंसा: 2023 से लापता 49 लोगों के परिजनों को मिलेगी 10-10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता, कैबिनेट ने दी मंजूरी।
A Kuki community relief camp in Churachandpur, Manipur
मणिपुर के चुराचांदपुर स्थित एक कुकी समुदाय के लोगों का राहत शिविरफोटो- द मूकनायक
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मणिपुर:में 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा के बाद से लापता हुए 49 लोगों के परिवारों के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। मणिपुर कैबिनेट ने इन सभी लापता लोगों के परिजनों को राहत देते हुए 10-10 लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि, कुकी और मैतेई समुदायों के बाच कड़वाहट अब भी बना हुआ है.

राज्य के गृह मंत्री कोन्थौजम गोविंदास ने बीते सितंबर महीने में 60 सदस्यीय विधानसभा को इस पूरे संकट की गंभीरता से अवगत कराया था। उन्होंने सदन को जानकारी दी थी कि पहले कुकी-जो और मैतेई समुदाय के बीच और उसके बाद कुकी तथा नगा समुदायों के बीच भड़के इस भीषण संघर्ष में 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 60 हजार से अधिक लोग अपना घर छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हुए हैं।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 की शाम को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह की अध्यक्षता में एक अहम कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक के संपन्न होने के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और विधायक सपम रंजन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गृह विभाग द्वारा पेश किए गए इस विशेष मानवीय सहायता प्रस्ताव को कैबिनेट ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया है।

सरकार के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से चलाए गए लगातार और सघन तलाशी अभियानों के बावजूद इन 49 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। ऐसे में इन लापता लोगों के परिवारों को मौजूदा कानूनी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण किसी भी तरह की सरकारी आर्थिक मदद पाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।

दरअसल, मौजूदा कानून के अनुसार किसी भी लापता व्यक्ति को पूरे सात साल बीत जाने के बाद ही आधिकारिक तौर पर मृत माना जाता है। इस कानूनी पेंच के कारण इन पीड़ित परिवारों के पास ना तो मृत्यु प्रमाण पत्र था और ना ही कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जो कि किसी भी लागू केंद्रीय सहायता योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे अनिवार्य दस्तावेज होते हैं।

सपम रंजन सिंह ने कहा कि लापता लोगों के परिवार भी हर दिन उसी तरह की गहरी मानसिक और आर्थिक पीड़ा से गुजर रहे हैं, जैसी तकलीफ इस संघर्ष में मारे गए लोगों के परिजन झेल रहे हैं। परिवारों की इसी वास्तविक मजबूरी और दर्द को समझते हुए ही राज्य सरकार ने उनके मामले पर गंभीरता से विचार किया और उन्हें यह एकमुश्त सहायता राशि देने का अहम फैसला लिया।

इस फैसले के अलावा, कैबिनेट ने उग्रवादी हिंसा के दौरान मणिपुर में अभियान चलाने वाले सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों के लिए भी अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। नए नियम के तहत, अब इन सुरक्षाकर्मियों को भी राज्य पुलिस के जवानों के बराबर ही मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।

संशोधित नियमों के अनुसार, अब ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलेगी। वहीं, स्थायी विकलांगता का शिकार होने की स्थिति में 2 लाख रुपये, गंभीर रूप से चोटिल होने पर 1 लाख रुपये और मामूली चोट लगने पर 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

गौरतलब है कि सुरक्षा बलों के लिए मुआवजे की पुरानी दरें साल 2006 में तय की गई थीं। उस समय के नियमों के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर महज 2 लाख रुपये और घायल होने पर केवल 10 हजार रुपये की सहायता राशि का ही प्रावधान था जिसे अब मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ा दिया गया है।

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