राज्यसभा चुनाव: सपा के 'PDA' फॉर्मूले को मायावती ने घेरा, उम्मीदवारों के चयन को बताया 'राजनीतिक पाखंड'

सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों पर बसपा प्रमुख का हमला, रामगोपाल यादव के नामांकन पर सवाल उठाते हुए PDA को बताया सिर्फ वोट बैंक का दिखावा।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती
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उत्तर प्रदेश: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा जुबानी हमला बोला। उन्होंने उत्तर प्रदेश से आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए सपा द्वारा चुने गए उम्मीदवारों की सूची को पूरी तरह से 'राजनीतिक पाखंड' करार दिया है।

बसपा प्रमुख ने इस बात की कड़ी आलोचना की कि सपा ने एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी रिश्तेदार रामगोपाल यादव को राज्यसभा भेजने के लिए नामांकन कराया है। इसके साथ ही, उन्होंने सपा के दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी की पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए, जिनका सीधा संबंध एक प्रमुख औद्योगिक घराने से है।

सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी मायावती ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि पार्टी का तीसरा उम्मीदवार महज़ 'चेहरा बचाने' की एक औपचारिकता है और चुनाव में उसकी हार लगभग तय है। मायावती के अनुसार, खुद को समाजवादी कहने वाली पार्टी का यह कदम जनता के साथ एक बड़ा धोखा है।

मायावती ने सपा के पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) नारे को भी पूरी तरह से कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पीडीए का इस्तेमाल सिर्फ चुनावों में वोट बटोरने के लिए करती है। लेकिन जब बात सांसद या विधायक बनाने की आती है, तो पार्टी केवल अपने परिवार के सदस्यों और पूंजीपतियों को ही तरजीह देती है।

समाजवादी पार्टी की इस दोहरी नीति और चरित्र पर निशाना साधते हुए मायावती ने बसपा के उसूलों को सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुजन समाज पार्टी पूरी तरह से 'आंबेडकरवादी' मिशन पर चलती है। उनकी पार्टी में भाई-भतीजावाद या पूंजीपतियों के प्रभाव के लिए कोई भी जगह नहीं है।

उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि बसपा हमेशा समाज के गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबके से आने वाले उन मेहनती आंबेडकरवादी लोगों को ही अपना उम्मीदवार बनाती है, जो वास्तव में समाज के हित के लिए जमीन पर मेहनत करते हैं।

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