
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर देश भर में कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं। इन आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए वकीलों के एक प्रमुख समूह ने इस पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एक स्वतंत्र पैनल के गठन का ऐलान किया है। इस संबंध में शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी किया गया।
लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टीट्यूशन (LAFC) द्वारा गठित इस पांच सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों को शामिल किया गया है। यह समिति चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई SIR प्रक्रिया की रूपरेखा, उसके जमीनी क्रियान्वयन और इसके संभावित परिणामों की बारीकी से समीक्षा करेगी।
इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी. लोकुर करेंगे। उनके साथ इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस ए.के. पटनायक और जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बदर दुर्रेज अहमद भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रेखा शर्मा और जस्टिस अंजना प्रकाश भी इस जांच दल का अहम हिस्सा होंगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य योग्य मतदाताओं पर पुनरीक्षण अभियान के समग्र प्रभाव का आकलन करना है। समिति इस पूरी SIR प्रक्रिया की संवैधानिक व वैधानिक वैधता और कार्यप्रणाली का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगी ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।
लॉयर्स एसोसिएशन के मीडिया समन्वयक और वकील सुभाष चंद्रन के माध्यम से जारी किए गए बयान में पैनल की भविष्य की कार्ययोजना स्पष्ट की गई है। इसके तहत यह समिति पूरे देश में जन सुनवाई आयोजित करेगी। प्रासंगिक कानूनों और अधिसूचनाओं की कानूनी जांच के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी व्यापक शोध किया जाएगा। इन विस्तृत प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद समिति दिसंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
इस पूरी जांच प्रक्रिया को दिशा देने के लिए देश के कई जाने-माने वरिष्ठ वकील अपनी रणनीतिक कानूनी सलाह भी देंगे। इन दिग्गजों में कपिल सिब्बल, सी.यू. सिंह, वृंदा ग्रोवर, राजू रामचंद्रन, प्रशांत भूषण, पारिशद फरासत, रेबेका मैमन जॉन और प्रशांतो चंद्र सेन जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं।
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