नई दिल्ली: मणिपुर के चुराचांदपुर में बुधवार को एक मैतेई युवक की हत्या ने राज्य में शांति बहाली की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कुकी महिला से विवाह करने वाले इस युवक की हत्या का शक एक ऐसे कुकी उग्रवादी संगठन पर है, जिसका सरकार के साथ कोई संघर्ष विराम (Ceasefire) समझौता नहीं है। इस क्रूर हत्या का वीडियो भी बनाया गया और उसे ऑनलाइन वायरल कर दिया गया। इस घटना ने केंद्र सरकार द्वारा फरवरी की शुरुआत तक राज्य में एक लोकप्रिय सरकार बनाने की कोशिशों पर अब सवालिया निशान लगा दिए हैं।
साजिश: माहौल बिगाड़ने की कोशिश
सुरक्षा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया है। उनका कहना है, "यह राज्य के माहौल को जानबूझकर खराब करने और हिंसा का एक नया दौर शुरू करने की साजिश है। वायरल वीडियो पर एक संदेश भी लिखा गया है— 'नो पीस, नो पॉपुलर गवर्नमेंट' (शांति नहीं, तो लोकप्रिय सरकार नहीं)। यह स्पष्ट करता है कि इस हत्या का मकसद राजनीतिक है।"
क्या है पूरा मामला?
बुधवार को कुकी-बहुल चुराचांदपुर के नाथजंग गांव से अज्ञात उग्रवादियों ने एक मैतेई युवक, जिसकी पहचान मनीटोम्बा (Mayanglambam) के रूप में हुई है, और उसकी पत्नी चिंगनू हाओकिप का अपहरण कर लिया। कुछ समय बाद उग्रवादियों ने पत्नी को तो छोड़ दिया, लेकिन पति की गोली मारकर हत्या कर दी।
हालांकि अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सुरक्षा सूत्रों को संदेह है कि यह यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (UKNA) के गुर्गों का काम हो सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह हत्या यूकेएनए (UKNA) नेतृत्व के आदेश पर हुई है या यह उनके कैडरों द्वारा लिया गया कोई स्वतंत्र फैसला था।
एक अन्य अधिकारी ने आशंका जताई है कि यह हत्या 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' भी हो सकती है। उन्होंने कहा, "जातीय विभाजन के दोनों तरफ कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो नहीं चाहते कि राज्य में कोई लोकप्रिय सरकार बने। हो सकता है कि UKNA के कैडर केवल एक माध्यम हों और इसके पीछे किसी और का दिमाग हो।"
कौन है संदिग्ध संगठन UKNA?
अन्य कुकी समूहों के विपरीत, जो 2008 से सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के तहत काम कर रहे हैं, UKNA इस समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। इस संगठन के पास लगभग 450 कैडर हैं। इनके पास 300 से अधिक आधुनिक हथियार होने की बात कही जाती है। यह समूह मणिपुर की पहाड़ियों और म्यांमार में अपने कैंप चलाता है। यह संगठन जातीय तनाव के बीच उभरा और अन्य समूहों की तरह इसकी कोई औपचारिक राजनीतिक शाखा नहीं है।
पीड़ित की पृष्ठभूमि और सामाजिक पहलू
सूत्रों का कहना है कि इस हत्या के पीछे बड़ी साजिश की आशंका इसलिए भी है क्योंकि पीड़ित युवक मूल रूप से मैतेई-बहुल काकचिंग खुनौ इलाके का रहने वाला था। वह 19 दिसंबर से ही गांव में रह रहा था और सभी को इस दंपती की मिश्रित जातीयता (Mixed Ethnicity) के बारे में जानकारी थी।
जानकारी के मुताबिक, मनीटोम्बा और हाओकिप की शादी 2022 में राज्य में जातीय हिंसा शुरू होने से पहले हुई थी। शादी के बाद उनके परिवारों ने उन्हें बेदखल कर दिया था। इसके बाद मनीटोम्बा अपनी पत्नी को छोड़कर आजीविका कमाने के लिए नेपाल चला गया था। वह इस साल दिसंबर में कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO) से अनुमति लेकर वापस आया था। KNO वह प्रमुख समूह है जो सरकार के साथ बातचीत कर रहा है और पहाड़ियों में मामलों को नियंत्रित करता है।
अधिकारियों ने 'ऑनर किलिंग' या जातीय घृणा की संभावना से इनकार किया है। एक अधिकारी ने बताया, "चुराचांदपुर में ऐसे 100 से ज्यादा दंपती समाज की पूरी जानकारी के साथ रह रहे हैं। इस जोड़े की शादी को काफी समय हो चुका था और महिला के माता-पिता भी यहाँ नहीं, बल्कि गुवाहाटी में रहते हैं। इसके अलावा, महिला का भाई खुद KNO का हिस्सा बताया जाता है।"
हिंसा में अचानक आई तेजी
यह हत्या ऐसे समय में हुई है जब केंद्र द्वारा मणिपुर में लोकप्रिय सरकार बनाने की खबरों के बाद हिंसा की घटनाओं में अचानक वृद्धि देखी गई है। 5 जनवरी को बिष्णुपुर जिले के फौगाकचाओ इखाई पुलिस स्टेशन के तहत सैतोन नगाउकोन गांव में एक खाली घर के अंदर IED विस्फोट हुआ। जब वहां भीड़ जमा हुई, तो एक और बम फट गया, जिसमें दो लोग घायल हो गए। सुरक्षा सूत्रों ने इस घटना में कुकी समूहों की संलिप्तता से इनकार किया है। इसी तरह 8 जनवरी को एक पेट्रोल पंप पर ग्रेनेड फेंका गया। इसके बाद पुलिस ने मैतेई विद्रोही समूह KYKL के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया।
सरकार गठन की राह में राजनीतिक रोड़े
हिंसा की इन घटनाओं के अलावा, केंद्र सरकार को राजनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ कुकी समूह 'अलग प्रशासन' (Separate Administration) की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। गुवाहाटी में पिछले हफ्ते कुकी-जो (Kuki-Zo) विद्रोही समूहों और विधायकों की बैठक में यह तय किया गया कि नई सरकार में भागीदारी तभी संभव होगी जब केंद्र कुकी-जो बहुल क्षेत्रों के लिए एक अलग केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) पर लिखित "राजनीतिक प्रतिबद्धता" दे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मांग मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने यानी 2027 से पहले पूरी होनी चाहिए।
यह शर्त केंद्र के लिए गले की फांस बन गई है। कुकी विधायकों के बिना सरकार बनाना उसकी वैधता पर सवाल उठाएगा, लेकिन चुनाव से पहले अलग प्रशासन का वादा करना भी व्यावहारिक नहीं माना जा रहा। दूसरी ओर, भाजपा के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है। पार्टी कई गुटों में बंटी हुई है। सूत्रों का कहना है कि राज्य इकाई का एक गुट सरकार गठन के पक्ष में नहीं है क्योंकि उनके नेता को मुख्यमंत्री बनने की संभावना नहीं दिख रही है। वहीं, बाकी गुटों में भी सीएम पद के लिए एक से अधिक दावेदार सामने आ रहे हैं।
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