
भोपाल। आनंदपुर धाम ट्रस्ट से जुड़े कथित सेक्स स्कैंडल और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर खुलासों के बाद महज 48 घंटे के भीतर मध्यप्रदेश सरकार ने अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को उनके पद से हटा दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब प्रदेश में निर्वाचन की प्रक्रिया चल रही है और सामान्य परिस्थितियों में स्थानांतरण पर रोक रहती है। इसी कारण सरकार को कलेक्टर को हटाने से पहले निर्वाचन आयोग से विशेष अनुमति लेनी पड़ी। आदित्य सिंह को को भोपाल गैस राहत विभाग का संचालक बनाया गया है।
यह पूरा घटनाक्रम तब तेज़ हुआ जब द मूकनायक ने आनंदपुर धाम को लेकर एक विस्तृत इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि आश्रम परिसर के भीतर कर्मचारियों और सेवक-सेविकाओं के साथ लंबे समय से दैहिक शोषण किया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आते ही कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में कलेक्टर पर कार्रवाई की गई।
कलेक्टर को हटाए जाने के तुरंत बाद यह खबर सामने आई कि उन्होंने आनंदपुर धाम ट्रस्ट से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। इसी आधार पर कलेक्टर को हटाए जाने की बात कही गई। हालांकि, बाद में यह दावा पूरी तरह झूठा और अफवाह साबित हुआ।
आनंदपुर धाम ट्रस्ट ने आधिकारिक तौर पर इस आरोप का खंडन किया। ट्रस्ट के प्रतिनिधि कुलदीप महात्मा ने स्पष्ट कहा कि- ट्रस्ट ने कलेक्टर के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की कलेक्टर ने ट्रस्ट से किसी भी तरह की राशि की मांग नहीं की प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी ट्रस्ट की ओर से कोई शिकायत नहीं भेजी गई। तीन करोड़ की मांग का दावा पूरी तरह अफवाह है, सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज से ट्रस्ट का कोई संबंध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में अनुराग जैन की भूमिका भी चर्चा में रही। एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री का नाम लेते हुए भ्रष्टाचार के मामलों में कलेक्टरों पर जिम्मेदारी डालने की बात कही थी। इसके कुछ ही समय बाद कलेक्टर आदित्य सिंह को हटाने का आदेश जारी कर दिया गया।
इस क्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या यह कार्रवाई वास्तविक जवाबदेही तय करने के लिए थी या फिर किसी बड़े मामले से ध्यान हटाने की कोशिश।
सूत्रों का दावा है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट से जुड़े सेक्स स्कैंडल और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बाद प्रशासन पर भारी दबाव था। ऐसे में कलेक्टर को हटाना एक तरह का “डैमेज कंट्रोल” कदम माना जा रहा है। सूत्र यह भी बताते हैं कि कलेक्टर द्वारा पैसे मांगे जाने की कहानी जानबूझकर गढ़ी गई ताकि असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके और मामले को दबाया जा सके।
सबसे गंभीर दावा यह है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट से प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक IAS अधिकारियों के तार जुड़े हो सकते हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
इसी संदर्भ में कांग्रेस ने सीधे तौर पर कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आनंदपुर धाम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के काम में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े रहे IAS अधिकारी विवेक अग्रवाल और अविनाश लवानिया सहित अन्य अधिकारी शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि ये दोनों अधिकारी पूर्व में मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रह चुके हैं, जिस से मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
मामले में एक और नाम सामने आया है। भोपाल के अमरीक सिंह नामक व्यक्ति पर हवाला कारोबार से जुड़े होने का आरोप है। बताया गया है कि इस संबंध में DGP को शिकायत भी की गई है। कांग्रेस का दावा है कि मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क में इस व्यक्ति की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
पूरे घटनाक्रम ने सरकार की मंशा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या कलेक्टर को हटाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश की गई?
क्या सेक्स स्कैंडल और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक चेहरों के नाम सामने आएंगे?
फिलहाल, आनंदपुर धाम मामला केवल एक आश्रम या एक कलेक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, सत्ता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या सचमुच पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाता है या फिर मामला फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।
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