
राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान बिना आवेदन के हजारों शिक्षकों के तबादलों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की उदासीनता का आरोप लगाते हुए 1 फरवरी को उनके विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी (कोटा) में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के तहत विशाल शिक्षक रैली निकालने की घोषणा की है। दूसरी ओर, राजस्थान हाईकोर्ट ने मिड-सेशन में बड़े पैमाने पर तबादलों पर सरकार से कड़ा सवाल उठाया है और मुख्य सचिव व प्रमुख शिक्षा सचिव को 23 जनवरी को तलब किया है।
शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री नवीन कुमार शर्मा ने बताया कि बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं, लेकिन शिक्षा विभाग ने बिना आवेदन मांगे प्रधानाचार्यों, उप प्रधानाचार्यों और व्याख्याताओं समेत हजारों शिक्षकों के तबादले कर दिए। उन्होंने कहा, "यह विभाग के इतिहास में पहला मौका है जब बोर्ड परीक्षाओं के बीच बिना नीति के ऐसा किया गया। इससे न केवल शिक्षकों बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।" प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने जोड़ा कि सरकार ने संगठन की मांगों पर वार्ता का आश्वासन दिया था, लेकिन 29 अगस्त 2025 को शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के फैसलों पर कोई अमल नहीं हुआ।
संघ के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश कुमार मीणा ने बताया कि रैली में पारदर्शी और स्थायी तबादला नीति लागू करने, तृतीय वेतन श्रृंखला के अध्यापकों की पदोन्नति, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, बकाया डीपीसी, वेतन विसंगतियों को दूर करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी। अन्य मांगों में पीईईओ व यूसीईईओ को अतिरिक्त स्टाफ व भत्ते, एडीईओ व एसीबीईओ पदों पर अनुभवी प्रधानाचार्यों की नियुक्ति, नवीन उच्च माध्यमिक विद्यालयों में व्याख्याता पदों की स्वीकृति तथा कम्प्यूटर अनुदेशकों व विशेष शिक्षकों की मांगें शामिल हैं।
संघ के मुख्य महामंत्री उम्मेद सिंह डूडी ने कहा, "शिक्षा मंत्री की उदासीनता से राज्य के शिक्षकों में रोष व्याप्त है। हम सत्ता के मद में राजनैतिक आधार पर शिक्षकों को परेशान करने के खिलाफ हैं।" संगठन के मुख्य संरक्षक एवं प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा ने भी इसे निंदनीय बताया और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के निर्देशों पर भी सुधार न होने पर नाराजगी जताई। प्रदेश नेतृत्व ने सभी शिक्षकों से रैली में भाग लेने की अपील की है।
इधर याचिकाकर्ता मैना गढ़वाल व महेश कुमार की ओर से दायर PIL पर जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने सरकार के रुख पर हैरानी जताई। याचिकाकर्ताओं के वकील संदीप कलवानियां ने कोर्ट को बताया कि 3 अगस्त से अब तक करीब 12 हजार से अधिक वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता व प्रधानाचार्य तबादले कर दिए गए, जबकि ट्रांसफर बैन के बावजूद विशेष अनुमति से यह कार्रवाई की गई। 12 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, ऐसे में यह छात्रों की पढ़ाई को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
कोर्ट ने सवाल किया, "मिड-सेशन में किस पॉलिसी के तहत इतने बड़े पैमाने पर तबादले हो रहे हैं?" मुख्य सचिव सुधांशु पंत व प्रमुख शिक्षा सचिव को आज (23 जनवरी) उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए। संघ ने हाईकोर्ट के इस कदम का स्वागत किया है और कहा कि यह शिक्षकों की लंबे संघर्ष का परिणाम है।
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