
नई दिल्ली: मणिपुर में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। राज्य पुलिस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक संयुक्त दल ने छह लियांगमई नागा नागरिकों की हत्या के मामले में एक दंपति को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी शुक्रवार, 10 जुलाई को तड़के सुबह की गई।
पुलिस प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों की पहचान प्रदीप और उसकी पत्नी अयिंगबी उर्फ मंगैह के रूप में हुई है। सुरक्षा बलों ने दोनों को कुकी-बहुल कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव से दबोचा है। यह इलाका राज्य की राजधानी इंफाल से उत्तर-पश्चिम दिशा में करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
राज्य के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों के परिवारों ने दोनों आरोपियों की पहचान की थी। इसके अलावा, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को जांच के दौरान मिले ठोस सबूतों में भी इस दंपति की संलिप्तता पूरी तरह साबित हुई है।
सुरक्षा बल इस समय इलाके में तलाशी और जब्ती की जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा कर रहे हैं। इसके साथ ही दोनों आरोपियों के खिलाफ कानूनी औपचारिकताएं भी शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि अपहरण की इस घटना को प्रत्यक्ष देखने वाले गवाहों के बयानों के आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी गई है।
यह पूरा मामला करीब दो महीने पुराना है, जब 13 मई को अज्ञात बंदूकधारियों ने कांगपोकपी जिले में थाडो समुदाय के तीन चर्च नेताओं की घात लगाकर हत्या कर दी थी। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद भड़की हिंसा में कुल 48 लोगों का अपहरण कर लिया गया था, जिनमें 28 कुकी और 20 नागा समुदाय के नागरिक शामिल थे। इनमें से 18 नागा नागरिकों को लेइलोन वैफेई गांव से ही अगवा किया गया था।
जातीय पहचान को लेकर थाडो समुदाय के भीतर कुकी समूह से जुड़ाव पर आंतरिक मतभेद रहे हैं। घटना वाले दिन यानी 13 मई को ही सुरक्षा बलों की मध्यस्थता से एक समझौता हुआ था। इसके तहत कुकी अपहरणकर्ताओं ने 14 नागाओं को और नागा अपहरणकर्ताओं ने 14 कुकियों को रिहा कर दिया था। इस शुरुआती अदला-बदली में लेइलोन वैफेई से अगवा किए गए 12 नागा नागरिक भी छूट गए थे।
इसके बाद विभिन्न चर्च संगठनों की अपीलों और लापता छह नागाओं का पता लगाने के सरकार के आश्वासन पर भरोसा करते हुए नागा समुदाय ने 9 जून को बाकी बचे 14 कुकी बंधकों को भी छोड़ दिया था। मगर इसके अगले ही दिन, 10 जून को सुरक्षाकर्मियों ने कांगपोकपी जिले से उन छह लापता नागा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव बरामद किए।
इन शवों के मिलने के बाद नागा-बहुल सेनापति जिले में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में मणिपुर के शीर्ष नागा संगठन 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' ने पूरे राज्य में 24 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया था।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस पूरे विवाद की जड़ यानी 13 मई को हुई तीन चर्च नेताओं की हत्या के मामले को मणिपुर पुलिस से अपने हाथ में लेकर नए सिरे से केस दर्ज किया था, जिसके बाद से ही लगातार इस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिशें की जा रही थीं।
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