नई दिल्ली: मणिपुर में छह नागा लोगों के अपहरण और उनकी निर्मम हत्या के मामले में एक अहम सुराग सामने आया है। राज्य के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस जघन्य अपराध के सिलसिले में कांगपोकपी के एक पुलिसकर्मी से गहन पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि इन सभी नागा युवकों के क्षत-विक्षत शव 10 जून को पुलिस ने बरामद किए थे। इस घटना के बाद से ही पूरे राज्य में भारी जनाक्रोश देखने को मिल रहा है।
हाल ही में कांगपोकपी पुलिस ने इस संदिग्ध अधिकारी से लंबी पूछताछ की है। आशंका जताई जा रही है कि 13 मई को लेइलोन वैफेई गांव से जिन छह नागा लोगों का अपहरण हुआ था, उनमें इस पुलिसकर्मी की सीधी भूमिका हो सकती है। अपहृत किए गए इन लोगों में दो पादरी भी शामिल थे। यह पूरी वारदात ठीक उसी दिन हुई थी, जब इलाके में तीन थाउदौ-कुकी चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी।
अधिकारी के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और अपराध में पुलिसकर्मी की सटीक संलिप्तता का पता लगाया जा रहा है। जिन नागा महिलाओं को बंधक बनाकर बाद में रिहा कर दिया गया था, उन्होंने पुलिस को दिए अपने बयान में इसी पुलिसकर्मी का विशेष रूप से जिक्र किया था। बढ़ते जनविरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने यह मामला राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दिया है, हालांकि जांच एजेंसी ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है।
इस अपहरण कांड के दौरान इन छह पुरुषों और उनके परिवार वालों को बंधक बनाया गया था। बाद में महिलाओं और बच्चों सहित 12 लोगों को छोड़ दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मई को ही कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समूहों द्वारा कम से कम 44 नागरिकों को बंधक बनाया गया था। इनमें से कई लोगों को पहले ही रिहा कर दिया गया था, जबकि 9 जून को कुकी समुदाय के 14 और लोगों को कैद से मुक्त किया गया। इसके ठीक अगले दिन 10 जून को सुरक्षा बलों ने छह लापता नागा लोगों के शव बरामद किए।
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच शनिवार, 4 जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर की सुरक्षा स्थिति की गहन समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और एनआईए को नागा, कुकी और मैतेई गुटों के संदिग्धों तथा सशस्त्र उग्रवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
गृह मंत्री ने नागा और कुकी समुदायों के बीच हुई हालिया और पुरानी हिंसक घटनाओं की धीमी जांच पर गहरी चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने अपराधों में शामिल सभी संदिग्धों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और क्षेत्र में मादक पदार्थों के व्यापार को पूरी तरह से नष्ट करने पर जोर दिया।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा नशीली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने के बाद म्यांमार अफीम आपूर्ति का एक नया वैश्विक केंद्र बन गया है। इसका सीधा और घातक असर भारत की पूर्वी सीमाओं, विशेषकर मणिपुर कॉरिडोर पर अब साफ तौर पर देखा जा सकता है।
दिल्ली में आयोजित इस अहम सुरक्षा बैठक में मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह इम्फाल से वर्चुअली शामिल हुए। उनके अलावा, इस बैठक में मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप, राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह और सैन्य अभियान महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत एस. पेंढारकर सहित कई शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।
राज्य में यह जातीय हिंसा 3 मई 2023 को कुकी और मैतेई समुदायों के बीच शुरू हुई थी, जो अब कुकी और नागा समुदायों तक फैल चुकी है। इस भीषण टकराव में अब तक 300 लोगों की जान जा चुकी है। 4 फरवरी को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटने और चुनी हुई सरकार की बहाली के बाद से ही कम से कम 40 लोग मारे जा चुके हैं।
भौगोलिक दृष्टिकोण से कांगपोकपी जिला उत्तर में नागा बहुल सेनापति जिले और दक्षिण में मैतेई बहुल घाटी जिलों से घिरा हुआ है। इस संवेदनशील स्थिति के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर आवश्यक वस्तुओं का परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नागा गांव के स्वयंसेवकों ने नागालैंड और असम से आने वाले माल पर नाकाबंदी कर दी है।
हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां हर हाल में कांगपोकपी में जरूरी चीजों की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। कुकी बहुल जिले की ओर जाने वाले वाहनों को रोकने के आरोप में हाल ही में नागा समुदाय के छह लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें