मणिपुर के उखरुल में उग्रवादियों ने घात लगाकर असम राइफल्स के काफिले को निशाना बनाया, दो बहादुर जवान शहीद

मणिपुर के उखरुल में 40 असम राइफल्स के काफिले पर उग्रवादियों का बड़ा हमला, आईईडी ब्लास्ट और भीषण गोलीबारी में दो जवान शहीद।
Assam Rifles Ukhrul ambush.
मणिपुर के उखरुल में उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। IED ब्लास्ट और भीषण फायरिंग में 2 जांबाज जवान शहीद।(सांकेतिक, फोटो साभार- द प्रिंट)
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नई दिल्ली: मणिपुर के उखरुल जिले में सोमवार को संदिग्ध उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए एक बड़े हमले को अंजाम दिया। 40 असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर किए गए इस कायराना हमले में दो जांबाज जवान शहीद हो गए। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और हमलावरों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हमले में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की पहचान वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और राइफलमैन सीएम सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि राइफलमैन सीएम सिंह काफिले के एक वाहन को चला रहे थे। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद तुरंत इलाज मिलने के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया।

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि यह हमला शंगशाक के पास स्थित नुंगशांग कोंग गांव के नजदीक उस समय हुआ, जब 40 असम राइफल्स का काफिला अपने कैंप से स्थानीय पुलिस स्टेशन की ओर बढ़ रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उग्रवादियों ने रास्ते में पड़ने वाले एक पुल के दोनों तरफ तीन इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) लगा रखे थे।

जैसे ही सुरक्षा बलों के वाहन इस संवेदनशील हिस्से से गुजरे, वैसे ही एक के बाद एक दो आईईडी ब्लास्ट हो गए। धमाकों के तुरंत बाद घात लगाए बैठे उग्रवादियों ने चारों तरफ से काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अधिकारियों ने इसे पूरी तरह से सोची-समझी और योजनाबद्ध तरीके से किया गया एक समन्वित हमला बताया है।

असम राइफल्स के जवानों ने भी बिना वक्त गंवाए तुरंत मोर्चा संभाला और उग्रवादियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू की। दोनों ओर से करीब एक घंटे तक भीषण गोलीबारी चलती रही। मुठभेड़ खत्म होने के बाद जब सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की सघन तलाशी ली, तो घटनास्थल से एक जिंदा आईईडी भी बरामद किया गया, जिसे समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया।

घायल जवानों को पहले शंगशाक स्थित असम राइफल्स के कैंप में आपातकालीन प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद उन्हें बेहतर और उन्नत चिकित्सा के लिए रेफर किया गया था। हालांकि, गहरे जख्मों के कारण दोनों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हमलावरों की धरपकड़ के लिए सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर 'कॉम्बिंग ऑपरेशन' तेज कर दिया है, हालांकि अब तक किसी भी उग्रवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

इस कायराना हमले की चौतरफा निंदा हो रही है। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने लोक भवन के माध्यम से एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे समाज में ऐसे हिंसक हमलों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि यह हरकत शांति और सुरक्षा बनाए रखने के सरकार के सामूहिक संकल्प को कभी कमजोर नहीं कर सकती।

वहीं, मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में भर्चना की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य राज्य में शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए चल रहे निरंतर प्रयासों को चोट पहुंचाते हैं। गृह मंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां दोषियों को कानून के शिकंजे में लाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगी और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

गौरतलब है कि असम राइफल्स के जवानों पर यह घातक हमला ऐसे समय में हुआ है, जब उखरुल में एक नई सुरक्षा चौकी (आउटपोस्ट) स्थापित करने को लेकर स्थानीय स्तर पर माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। बीते रविवार को ही इलाके में इस नई चौकी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें कम से कम चार नागरिक घायल हो गए थे।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लांबुई गांव में तैनात असम राइफल्स के करीब 40 जवानों ने स्थानीय प्राधिकारियों से बिना कोई पूर्व मशविरा किए 'न्यू हेवन' इलाके में एक नई चौकी स्थापित करने का प्रयास किया था। इसके विरोध में महिलाओं और छात्र संगठनों सहित स्थानीय निवासियों ने निर्माण कार्य रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा था।

मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के बाद से ही सुरक्षा बल लगातार संवेदनशील इलाकों में सर्च और डॉमिनेशन ऑपरेशन चला रहे हैं। पिछले लंबे समय से जारी इस आंतरिक संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। तमाम शांति प्रयासों के बावजूद यह संकट राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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