मणिपुर में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। कुकी उग्रवादी समूहों द्वारा कथित तौर पर चार लियांगमई नागा नागरिकों की हत्या किए जाने के बाद शुक्रवार 28 अगस्त को राज्य के नागा बहुल इलाकों में पूर्ण बंदी देखी गई।
यह दर्दनाक घटना गुरुवार, 27 अगस्त सुबह की है। कुकी बहुल कांगपोकपी जिले में माकुई अशांग और थानम्बा नागा गांवों के बीच की सड़क पर इन निर्दोष नागरिकों को गोलियों से भून दिया गया। ये सभी लोग माकुई गांव से सेनापति जिले की ओर जा रहे थे, तभी रास्ते में उन पर यह जानलेवा हमला हुआ।
इस हिंसक घटना में एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे इलाज के लिए सेनापति के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, हमले के बाद लापता बताया जा रहा एक छात्र नेता किसी तरह अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में कामयाब रहा।
घटना के विरोध में मणिपुर के नागा संगठनों के शीर्ष निकाय 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' (यूएनसी) ने नागा क्षेत्रों में एक दिवसीय 'गेन्ना' का आह्वान किया था। यह एक तरह का सख्त प्रतिबंध, विश्राम और सामुदायिक प्रार्थना का समय होता है। इस बंदी के प्रभाव से कामजोंग, नोने, सेनापति, तामेंगलोंग और उखरुल जिलों में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा।
यूएनसी की कार्य समिति के सचिव ए.सी. थोत्सो ने बताया कि चारों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए सेनापति पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार को एक विशेष शोक सभा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
कांगपोकपी के अधिकारियों ने जानकारी दी कि हमले वाली जगह के रास्ते में एक गांव के पास नाकेबंदी थी। इसी गतिरोध के कारण सुरक्षा बल गुरुवार (27 अगस्त 2026) को शवों को बरामद नहीं कर सके थे। बाद में शुक्रवार (28 अगस्त 2026) सुबह शवों को वहां से निकालकर सेनापति लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
इस जघन्य हत्याकांड पर कड़ी नाराजगी जताते हुए यूएनसी ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। परिषद ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग रखी है।
राज्य के बिगड़ते हालातों पर मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच पनपे अविश्वास को खत्म करने और राज्य में स्थायी शांति बहाल करने के लिए समाज के सभी वर्गों से एकजुट होकर प्रयास करने की अपील की।
3 मई 2023 से पहले के शांतिपूर्ण दिनों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह नियमित रूप से पहाड़ी इलाकों का दौरा किया करते थे। तब वहां समुदायों के बीच शांति, सद्भाव और सहयोग का बेहतरीन माहौल हुआ करता था। उन्होंने भारी मन से कहा कि तीन साल पहले भड़की हिंसा ने राज्य की स्थिति को बुनियादी तौर पर बदल कर रख दिया है।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि आज कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं जो शांति नहीं चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमें ऐसे लोगों की जल्द से जल्द पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
इसी बीच, शुक्रवार दोपहर को राज्य में एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। भारतीय जनता पार्टी के विधायक और मणिपुर सरकार के प्रवक्ता सपम रंजन सिंह के आवास पर अचानक एक बम धमाका हो गया। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
धमाके की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल विधायक के आवास का दौरा किया और विस्फोट स्थल का मुआयना किया। दोनों ही नेताओं ने इस कायराना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।
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