मणिपुर: उखरुल में फिर भड़की हिंसा, 25 घर और सरकारी क्वार्टर खाक; जान बचाने के लिए लोगों का पलायन शुरू

मणिपुर के उखरुल में तनाव: लिटन में 25 घर जलकर खाक, कर्फ्यू लागू; जान बचाने के लिए पलायन को मजबूर हुए लोग
A Kuki community relief camp in Churachandpur, Manipur
मणिपुर के चुराचांदपुर स्थित एक कुकी समुदाय के लोगों का राहत शिविरफोटो- द मूकनायक
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इम्फाल/उखरुल: मणिपुर के उखरुल जिले में शांति भंग होने की एक और घटना सामने आई है। जिले के दो सटे हुए गांवों—लिटन और मंगकोट—में तंगखुल नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। सोमवार को स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब हिंसा के डर से बड़ी संख्या में लोगों को अपने पुश्तैनी घर छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा। पुलिस के अनुसार, उपद्रवियों ने 25 घरों और चार सरकारी क्वार्टरों को आग के हवाले कर दिया है।

रात के अंधेरे में तांडव, गूंजी ऑटोमेटिक राइफलों की आवाज

पुलिस अधिकारियों और लिटन पुलिस स्टेशन से मिली जानकारी के मुताबिक, हिंसा की शुरुआत रविवार देर रात करीब 11:30 बजे लिटन बाजार इलाके में हुई। बड़ी संख्या में आए उपद्रवियों ने घरों में आग लगाना शुरू कर दिया। लोगों में दहशत तब और बढ़ गई जब ऑटोमेटिक राइफल्स से फायरिंग की आवाजें सुनाई देने लगीं।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जलाए गए ढांचों में कुकी समुदाय के लोगों के दो घर भी शामिल हैं।

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घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए लोग

हालात बिगड़ते देख कुकी और तंगखुल नागा, दोनों ही समुदायों के लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। सोमवार को दिल दहला देने वाला मंजर देखा गया, जहां लोग ट्रकों, निजी गाड़ियों और यहां तक कि पैदल ही अपने घरों से निकल रहे थे। वे अपने साथ गद्दे, बर्तन और जो भी कीमती सामान बचा सके, उसे समेटकर ले जा रहे थे।

एक स्थानीय तंगखुल महिला, जो लिटन बाजार में रहती हैं, ने उस खौफनाक रात का जिक्र करते हुए बताया, "शोर-शराबा सुनकर हम बुरी तरह डर गए थे और हमने खुद को घरों के अंदर बंद कर लिया था। बाहर हथियारबंद लोगों की भीड़ थी, जो घरों को तोड़ रही थी और आग लगा रही थी।"

क्या थी हिंसा की असल वजह?

पुलिस का कहना है कि इस पूरे विवाद की जड़ 7 फरवरी की शाम लिटन सरेखोंग में हुई एक घटना थी। वहां शराब के नशे में हुए झगड़े ने विकराल रूप ले लिया था। इस दौरान स्टर्लिंग नाम के एक तंगखुल नागा व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए इम्फाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी घटना के बाद तनाव बढ़ता गया।

प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा बलों की तैनाती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उखरुल के जिला मजिस्ट्रेट ने रविवार शाम से ही लिटन गांव में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि विश्वसनीय सूत्रों से तंगखुल और कुकी समुदायों के बीच शांति भंग होने और जान-माल के नुकसान की आशंका जताई गई है।

शांति बहाली के लिए इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स ने मोर्चा संभाल लिया है। इसके अलावा, सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए 8 बिहार रेजिमेंट, चौथी महार रेजिमेंट और CAPF की अतिरिक्त टुकड़ियां भी तैनात की गई हैं।

रविवार शाम को जब भीड़ ने पथराव शुरू किया, तो उन्हें तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।

नेताओं का दौरा और मौजूदा हालात

इम्फाल से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित लिटन एक छोटा सा व्यावसायिक कस्बा है, जो आसपास के गांवों के लिए व्यापारिक केंद्र (Trading Hub) का काम करता है। यहाँ दोनों समुदायों के लोग रहते हैं और रिहायशी इलाके व बाजार आपस में जुड़े हुए हैं, जिसके कारण तनाव तेजी से फैला।

कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए पुलिस महानिरीक्षक (IG - Law & Order) के नेतृत्व में मणिपुर पुलिस की एक टीम ने मौके का दौरा किया है। इसके अलावा, कुकी समुदाय से आने वाली सैकुल की विधायक किमनियो हाओकिप और तंगखुल नागा समुदाय के उखरुल विधायक राम मुइवा ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज (FIR) कर लिया है और आगे की जांच जारी है। प्रशासन का पूरा जोर अब इलाके में शांति और विश्वास बहाल करने पर है।

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