
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर 'सिस्टम' की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा खोदे गए एक खुले गड्ढे ने 25 वर्षीय कमल ध्यानी की जान ले ली। यह मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना का नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली संवेदनहीनता का माना जा रहा है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कमल गड्ढे में गिरने के बाद जिंदा था, और यह बात वहां मौजूद ठेकेदार और मजदूर को पता थी, लेकिन मदद करने के बजाय वे मौके से भाग खड़े हुए।
हादसे की काली रात: क्या हुआ था उस दिन?
घटना 5 और 6 फरवरी की दरमियानी रात की है। जनकपुरी के जोगिंदर सिंह मार्ग पर आंध्र स्कूल के पास दिल्ली जल बोर्ड ने सीवर लाइन के लिए करीब 20 फुट लंबा और 14 फुट गहरा गड्ढा खोद रखा था। FIR के मुताबिक, वहां न तो कोई बैरिकेडिंग थी, न ही कोई चेतावनी बोर्ड या रोशनी का इंतजाम।
कमल (25), जो एक कॉल सेंटर में काम करता था, अपनी अपाचे बाइक (DL9SCJ9478) से घर लौट रहा था, तभी वह इस जानलेवा गड्ढे में गिर गया। FIR संख्या 0035/2026 के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस का बड़ा खुलासा: "उन्हें पता था अंदर कोई है, पर वे भाग गए"
इस मामले में सबसे खौफनाक पहलू दिल्ली पुलिस के डीसीपी (DCP) शरद के बयान से सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक, रात करीब 12:22 बजे एक चश्मदीद विपिन सिंह ने बाइक को गड्ढे में गिरते देखा और पास के एक गार्ड को बताया। गार्ड देशराज ने पास ही तिरपाल में सो रहे ठेकेदार के मजदूर योगेश को जगाया। मजदूर योगेश ने गड्ढे में झांककर देखा। उसे बाइक की हेडलाइट जलती हुई दिखी और एक इंसान (कमल) भी नजर आया। योगेश ने तुरंत अपने सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति (47) को फोन किया। राजेश 15-20 मिनट में अपनी कार से मौके पर पहुंचा।
पुलिस का कहना है कि सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश और मजदूर योगेश दोनों को पता था कि गड्ढे में एक आदमी गिरा है और जिंदा हो सकता है। लेकिन पुलिस या एंबुलेंस को बुलाने के बजाय, वे डर के मारे मौके से भाग गए और कमल को मरने के लिए छोड़ दिया। सुबह 8 बजे जब पीसीआर कॉल हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
परिवार की बेबसी: भाई टॉर्च जलाकर ढूंढता रहा, सिस्टम अंधेरे में सोता रहा
मृतक कमल के जुड़वा भाई, करण ने बताया कि रात 11:53 पर उनकी आखिरी बात हुई थी। जब कमल घर नहीं पहुंचा, तो परिवार पूरी रात उसे ढूंढता रहा। विडंबना देखिए कि परिवार रात में उसी गड्ढे के पास पहुंचा था और फ्लैश लाइट जलाकर देखा भी था, लेकिन सुरक्षा इंतजाम न होने और गहराई ज्यादा होने के कारण उन्हें कुछ नजर नहीं आया। जिस भाई को वो आवाजें दे रहे थे, वह उसी गड्ढे में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा था।
गिरफ्तारी और सवाल: गरीब मजदूर पर गाज, बड़े अफ़सर आजाद?
पुलिस ने इस मामले में सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया है और मजदूर योगेश की तलाश में यूपी के इटावा में टीम भेजी है ।
हालांकि, इस कार्रवाई पर सवाल भी उठ रहे हैं। एक पत्रकार ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि पुलिस ने दिहाड़ी मजदूर योगेश को तो आरोपी बना दिया क्योंकि उसने पुलिस को नहीं बताया, लेकिन दिल्ली जल बोर्ड के उन बड़े अधिकारियों और मुख्य ठेकेदार पर हाथ डालने से बच रही है जो असली गुनहगार हैं। मजदूर के पास न पैसा है, न पावर, जबकि असली लापरवाही उस सिस्टम की है जिसने सड़क पर मौत का कुआं खुला छोड़ दिया था।
पुलिस की कार्रवाई
घटना के तूल पकड़ने के बाद जल मंत्री ने दिल्ली जल बोर्ड के तीन इंजीनियरों (असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर) को सस्पेंड कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमल की मौत का कारण पेट के एरिया में चोट और सदमा बताया गया है।
कमल की मौत ने दिल्ली की चमचमाती सड़कों के नीचे छिपे खोखले सिस्टम की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक मजदूर और छोटे ठेकेदार की गिरफ्तारी से कमल के परिवार को न्याय मिलेगा? या फिर "सिस्टम" की बड़ी मछलियां एक बार फिर साफ बच निकलेंगी?
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