
नई दिल्ली: मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने रविवार को एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि 10 जून को बरामद किए गए छह नागा पुरुषों के शवों की पहचान करने का काम पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। हालांकि, कानूनी और प्रशासनिक कारणों से इन शवों को अभी तक उनके परिजनों के हवाले नहीं किया जा सका है।
इंफाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने इस देरी का कारण स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि नागा समुदाय के शीर्ष संगठन 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' ने राज्य सरकार के समक्ष कुछ विशेष मांगें रखी हैं। फिलहाल सरकार इन मांगों की गहनता से जांच कर रही है। इसी वजह से शवों को सौंपने की प्रक्रिया में थोड़ा और समय लगने की संभावना है।
कुकी उग्रवादी गुटों के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SoO) समझौते को खत्म करने की नागा संगठनों की मांग पर भी गृह मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। गोविंददास ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल मणिपुर सरकार के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत सरकार की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी पक्ष मिलकर इस विषय पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं।
इस घटना की पृष्ठभूमि 13 मई से जुड़ी है, जब कांगपोकपी जिले में एक हिंसक हमले के दौरान थादौ जनजाति के तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसी दिन दो पादरियों सहित छह नागा पुरुषों और उनके परिवार के सदस्यों का अपहरण कर लिया गया था। हालांकि, बाद में महिलाओं और बच्चों समेत कुल 12 लोगों को अपहरणकर्ताओं ने रिहा कर दिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुकी और नागा दोनों ही गुटों द्वारा कम से कम 44 लोगों को बंधक बनाया गया था। इनमें से कई लोगों को पहले ही सुरक्षित छोड़ दिया गया था, जबकि कुकी समुदाय के 14 सदस्यों को पिछले मंगलवार को रिहाई मिली।
इस रिहाई के ठीक एक दिन बाद, सुरक्षाबलों को तलाशी अभियान के दौरान लापता हुए उन छह नागा पुरुषों के शव मिले, जिनकी अब आधिकारिक तौर पर पहचान कर ली गई है।
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